मवेशी सड़कों पर, किसान खेतों में पहरेदार; दक्षिण पाटन में बढ़ी घुमंतू पशुओं की समस्या

पाटन। पाटन विधानसभा क्षेत्र में घुमंतू मवेशियों की समस्या किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले मवेशियों से फसल बचाने के लिए किसान दिन-रात खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं। दक्षिण पाटन क्षेत्र के किसानों ने इसी समस्या को लेकर आज पाटन एसडीएम कार्यालय की ओर कूच किया। किसानों को तेलीगुंडरा के पास रोका गया, जहां प्रशासन ने किसानों से चर्चा कर समस्या के समाधान की दिशा में पहल करने पर विचार-विमर्श किया।
आखिर घुमंतू मवेशियों का मालिक कौन?
किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि खुले में घूम रहे इन मवेशियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या ये पशुपालकों के मवेशी हैं, आम जनता की जिम्मेदारी है या शासन-प्रशासन की? पशुपालकों द्वारा मवेशियों को खुले में छोड़ दिए जाने से एक ओर जहां किसानों की फसल बर्बाद हो रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्य सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
चारागाह की जमीन पर अतिक्रमण से बढ़ी समस्या
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और चारागाह की जमीनों के लगातार कम होने से मवेशियों के लिए चारा-पानी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। कई स्थानों पर सरकारी जमीनों का मुरम के लिए उपयोग किए जाने तथा कहीं-कहीं लाल ईंट भट्ठों के लिए जमीन के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब मवेशियों के लिए चरने की जगह ही नहीं बचेगी तो उनके चारा-पानी की व्यवस्था कैसे होगी?
गौठान बने, लेकिन व्यवस्था पर सवाल
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए गौठानों की वर्तमान स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई गौठान जर्जर हो चुके हैं और पशुओं के रहने योग्य स्थिति में नहीं हैं। जहां गौठान उपयोग की स्थिति में हैं, वहां भी पर्याप्त चारा और पानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में घुमंतू मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए प्रशासन को ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाने की जरूरत है।
कौही की गौशाला की क्षमता भी बनेगी समाधान का हिस्सा
कौही में मौजूद गौशाला में कितने मवेशियों को रखा जा सकता है और वहां पशुओं के लिए चारा-पानी तथा देखरेख की क्या व्यवस्था है, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है। किसानों का कहना है कि केवल मवेशियों को पकड़कर कहीं छोड़ देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। पशुओं के लिए पर्याप्त आश्रय, चारा-पानी और देखरेख की व्यवस्था के साथ पशुपालकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
फसल के साथ इंसान और मवेशियों की जान भी खतरे में
घुमंतू मवेशियों की समस्या का सीधा असर किसानों की फसल पर पड़ रहा है, लेकिन मामला यहीं तक सीमित नहीं है। सड़कों पर बैठे या घूमते मवेशियों के कारण वाहन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। दुर्घटना में जहां बेजुबान पशुओं की जान जा सकती है, वहीं वाहन चालकों और राहगीरों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
इस समस्या का समाधान केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पशुपालकों और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। पशुपालकों को अपने मवेशियों को खुले में छोड़ने के बजाय उनके चारा-पानी और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी। आज भी अनेक पशुपालक अपने मवेशियों की नियमित देखरेख करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं।
किसानों का कहना है कि यदि पशुपालक अपने मवेशियों की जिम्मेदारी स्वयं निभाएं और प्रशासन चारागाह, गौठान व गौशाला की व्यवस्था को मजबूत करे, तो किसानों की फसल भी सुरक्षित रहेगी, मवेशी भी सुरक्षित रहेंगे और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा। घुमंतू मवेशियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब ठोस पहल की आवश्यकता है।



