महुदा में सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल! अब बाहरी लोगों की नजर, खरीद-फरोख्त की कोशिशों से मचा हड़कंप

पाटन/अमलेश्वर। पाटन विकासखंड के उत्तर पाटन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम महुदा में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे और जमीन की खरीद-फरोख्त की कोशिशों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, गांव में कुछ लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर मकान और दुकानें बनाकर निवास एवं व्यवसाय किया जा रहा है। अब रायपुर के नजदीक होने के कारण उक्त भूमि को लेकर बाहरी लोगों की दिलचस्पी बढ़ने और खरीद-फरोख्त की कोशिश किए जाने की चर्चा है।
जानकारी के मुताबिक, महुदा चौक से कोपेडीह-अमलेश्वर पहुंच मार्ग के किनारे कई मकान और दुकानें बनी हुई हैं। इनमें कुछ लोग निवास कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर दुकानें संचालित की जा रही हैं। आरोप है कि शासकीय भूमि पर कब्जा कर बैठे कुछ लोग उसे निजी संपत्ति की तरह बेचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, बाहरी लोगों द्वारा भी ऐसी जमीन खरीदने में रुचि दिखाए जाने की बात सामने आ रही है।
शासकीय जमीन की बिक्री का अधिकार किसे?
यदि संबंधित भूमि वास्तव में शासकीय है, तो उसकी खरीद-फरोख्त की वैधता और उस पर काबिज लोगों के अधिकारों की जांच आवश्यक है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित भूमि का वास्तविक स्वरूप क्या है? क्या वह शासकीय भूमि है या निजी स्वामित्व की? यदि भूमि सरकारी है, तो उस पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां किस आधार पर संचालित हो रही हैं? साथ ही, जमीन की खरीद-फरोख्त की कोशिशों के पीछे की वास्तविकता क्या है?
जांच के बाद ही होगा स्थिति स्पष्ट
पूरा मामला राजस्व विभाग की जांच का विषय है। संबंधित भूमि के खसरा नंबर, राजस्व अभिलेख, सीमांकन और स्वामित्व की जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले को संज्ञान में लेकर जांच करते हैं या नहीं। यदि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे अथवा उसकी अवैध बिक्री की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता होगी।



