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जिस घर में बहु और बेटी में फर्क नहीं किया जाता है वह घर ऐसे ही स्वर्ग बन जाता है/भुपेन्द्र पांडे

संसार में सभी नवीनतम चीजों को स्वीकार कर लेना लेकिन अपने संस्कार हमेशा पुराने ही रहने देना /भुपेन्द्र पांडे

पाटन बलराम वर्मा । अघन के पवित्र माह में पिन्टु वर्मा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन गुंडरदेही के कथावाचक पंडित भुपेन्द्र पांडे जी महराज ने कृष्ण की बाल लीला व माखन चोर कि कथा का वर्णन किया और मानव जीवन की विभिन्न बातो से जोड़कर सहजता के साथ कथा को समझाया । उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में उनका नटखट बचपन, यशोदा मैया के लाड़-प्यार, माखन चोरी, और गोपियों के घरों से दूध-दही चुराते थे।

संसार में सभी नवीनतम चीजों को स्वीकार कर लेना लेकिन अपने संस्कार हमेशा पुराने ही रहने देना ।इस लीला में उन्होंने पूतना राक्षस का वध किया, इंद्र के प्रकोप से गोकुल को बचाया और गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को अभयदान दिया। ये सभी लीलाएं उनके दिव्य स्वरूप और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती हैं।

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कृष्ण का जन्म कंस के कारागार में हुआ था, लेकिन उन्हें मथुरा से सुरक्षित गोकुल पहुंचाया गया, जहाँ वे नंद और यशोदा के पुत्र के रूप में पले-बढ़े। बचपन से ही वे बहुत नटखट थे, जो ग्वालों और गोपियों के साथ खेलते थे और अक्सर माखन चुराकर खा जाते थे, जिसके लिए उन्हें यशोदा मैया से डांट भी खानी पड़ती थी। जिस घर में बहु और बेटी में फर्क नहीं किया जाता है वह घर ऐसे ही स्वर्ग बन जाता है कंस ने कृष्ण को मारने के लिए पूतना नामक राक्षसी को भेजा, जिसने विषैला दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन कृष्ण ने उसका वध कर दिया। जब इंद्र ने गोकुल पर भारी वर्षा की, तो कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों को उससे ढक लिया और उनकी रक्षा की। अपनी मनमोहक मुरली से गोपियों के दिलों को चुरा लिया, जिससे वे उनकी भक्ति में लीन हो गईं।

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कथा में प्रमुख रुप से पिन्टु वर्मा पुष्कर वर्मा चन्दुलाल वर्मा नंदकुमार वर्मा ईश्वरीय वर्मा बलराम वर्मा योगिता वर्मा मंजु वर्मा बदरा बाई कल्याणी बाई बिन्दु बाई मनीषा वर्मा दुर्गा वर्मा पुजा वर्मा भुनेश्वरी खोमेन्द्र विनय मुरली वर्मा कमलेश कुमार साहु मेघु टिकेन्द्र नाथ पुनीत वर्मा सहित इंदिरा नगर पाटन मुहल्लावासी उपस्थित थे ।

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