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तानाशाही रवैये के खिलाफ निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बीज निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का आंदोलन

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कर्मचारियों ने वर्तमान प्रबंध संचालक के कथित तानाशाही रवैये, कर्मचारी विरोधी कार्यशैली तथा लंबे समय से लंबित मांगों की लगातार अनदेखी के विरोध में आंदोलन तेज कर दिया है।

कर्मचारियों का कहना है कि निगम के इतिहास में अनेक प्रबंध संचालक आए और गए, लेकिन सभी ने कर्मचारियों की समस्याओं को समझते हुए संवेदनशीलता, समन्वय एवं सहयोग की भावना के साथ कार्य किया। वर्तमान प्रबंध संचालक का रवैया इससे बिल्कुल विपरीत है, जो न केवल कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहा है, बल्कि निगम के सुचारू संचालन में भी बाधा उत्पन्न कर रहा है।

कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान प्रबंध संचालक द्वारा प्रदेशभर के बीज प्रबंधकों पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि किसी भी परिस्थिति में बीज निगम का कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके लिए बीज प्रबंधकों को मौखिक एवं अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी जा रही है कि यदि कार्य प्रभावित हुआ तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन अथवा वेतनवृद्धि रोकने जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है। कर्मचारियों ने इसे अमानवीय बताते हुए कहा कि यह प्रशासनिक मर्यादाओं एवं कर्मचारी अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने और उनका समाधान निकालने के बजाय प्रबंधन भय एवं दबाव की नीति अपनाकर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। बीज प्रबंधकों पर दबाव बनाकर कार्य करवाने की कोशिश से पूरे निगम में भय, असंतोष एवं असुरक्षा का वातावरण निर्मित हो गया है।

कर्मचारियों के अनुसार निगम की पूरी कार्यप्रणाली दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा एवं समर्पण पर टिकी हुई है। बीज भंडारण, उपार्जन कार्य, कंप्यूटर संचालन, साथी पोर्टल संचालन, लेबर-हमाल व्यवस्था तथा वितरण प्रणाली सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्य इन्हीं कर्मचारियों के भरोसे संचालित होते हैं। वर्षों से ये कर्मचारी सीमित संसाधनों एवं कठिन परिस्थितियों में भी शासन की योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते आए हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।

कर्मचारियों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपे तथा कई बार वार्ता की पहल की, तब भी प्रबंधन ने समाधान निकालने के बजाय केवल तानाशाही रवैया अपनाकर समय निकालने का प्रयास किया। अब जब कर्मचारियों ने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाया है, तो उन्हें दबाने के लिए बीज प्रबंधकों पर अनावश्यक दबाव बनाकर कार्य प्रभावित न होने देने का फरमान जारी किया जा रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन का यह रवैया स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वर्तमान प्रबंध संचालक कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के बजाय केवल भय और दबाव का माहौल बनाकर अपनी तानाशाही थोपना चाहते हैं। इससे निगम की कार्य संस्कृति प्रभावित हो रही है तथा कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिर रहा है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। यदि कर्मचारियों अथवा बीज प्रबंधकों पर दबाव बनाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की गई तो इसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में श्रम सम्मान राशि 4000 रुपये की पुनः स्वीकृति, लंबित एरियर्स राशि का तत्काल भुगतान तथा आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिजनों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें वर्षों से लंबित हैं और इन्हें पूरा करना निगम प्रशासन की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

कर्मचारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वेतन अथवा सुविधा का नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार एवं न्याय का प्रश्न है। उन्होंने प्रबंधन से तानाशाही रवैया त्यागकर सकारात्मक पहल करने, कर्मचारियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने तथा समस्याओं का शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है।

कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि यदि प्रबंधन ने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं किया और कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप धारण करेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी निगम प्रबंधन की होगी।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

दिसंबर माह के वेतन से काटी गई 4000 रुपये श्रम सम्मान निधि राशि को पुनः निरंतर जारी किया जाए तथा 1 अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक के 65 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को लंबित एरियर्स राशि का भुगतान किया जाए।

आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों के परिजनों को 50,000 रुपये सहायता राशि प्रदान करने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाए, जिससे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में अपने अधिकार, सम्मान एवं परिवार की सुरक्षा का विश्वास कायम हो सके।

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