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मोतीपुर में डबरी तालाब का अस्तित्व खतरे में, रास्ता बंद होने से निस्तारी से वंचित ग्रामीण

पाटन, मोतीपुर। जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत मोतीपुर में वर्षों से ग्रामीणों की निस्तारी का प्रमुख साधन रहा डबरी तालाब आज अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। तालाब तक पहुंचने का रास्ता बंद हो जाने के कारण ग्रामीण इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, तालाब के किनारे शासन द्वारा निर्मित निर्मलघाट (पचरी) भी उपयोग के अभाव में बेकार साबित हो रहा है। तालाब के आसपास घास-फूस उग आई है, लेकिन इस समस्या की ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा है।

रास्ता बंद, निस्तारी के लिए परेशान ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों से डबरी तालाब का उपयोग निस्तारी सहित गांव के विभिन्न सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। गांव में तालाब होने से लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए सुविधा मिलती थी। लेकिन अब तालाब तक पहुंचने का रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीण निस्तारी से वंचित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर तालाब तक जाने वाला रास्ता किसने और किन परिस्थितियों में बंद किया? क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है?

निर्मलघाट निर्माण के बाद भी उपयोग नहीं

शासन द्वारा ग्रामीणों की सुविधा के लिए तालाब के किनारे निर्मलघाट (पचरी) का निर्माण कराया गया है, ताकि लोग आसानी से निस्तारी कर सकें। लेकिन जब तालाब तक पहुंचने का रास्ता ही बंद है, तो इस निर्माण का लाभ ग्रामीणों को कैसे मिलेगा? उपयोग नहीं होने के कारण तालाब के किनारों पर घास-फूस उग आई है। इससे स्पष्ट है कि केवल निर्माण कार्य करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके उपयोग और रखरखाव की व्यवस्था करना भी जरूरी है।

तालाब का रास्ता किसने किया बंद, ग्रामीणों में चर्चा

गांव के बीच स्थित इस तालाब तक पहुंचने का रास्ता बंद होने का मामला ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीण जानना चाहते हैं कि सार्वजनिक उपयोग में आने वाले तालाब का रास्ता आखिर किसने बंद किया और उसे दोबारा खोलने की जिम्मेदारी किसकी है। यदि तालाब का रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को निस्तारी में परेशानी हो रही है, तो संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।

जलस्तर बनाए रखने में तालाबों की अहम भूमिका

तालाब केवल निस्तारी का साधन ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गांवों में तालाबों के संरक्षण से जल संचयन को बढ़ावा मिलता है और भूजल स्तर को सहारा मिल सकता है। यही वजह है कि शासन द्वारा तालाबों के संरक्षण एवं निर्माण को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके बावजूद मोतीपुर में तालाब तक पहुंचने का रास्ता बंद होने और उसके अनुपयोगी होते जाने की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

प्रशासन से रास्ता खुलवाने और तालाब के संरक्षण की मांग

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और ग्राम पंचायत पर टिकी है। जरूरत है कि तालाब तक पहुंचने के रास्ते की स्थिति की जांच कराई जाए, रास्ता बंद होने के कारणों का पता लगाया जाए और नियमानुसार सार्वजनिक रास्ते को बहाल करने की कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब की साफ-सफाई कराकर निर्मलघाट को उपयोग योग्य बनाया जाए, ताकि ग्रामीण फिर से इसका लाभ उठा सकें।

अब सवाल यह है कि मोतीपुर के इस डबरी तालाब को उसका पुराना स्वरूप और सार्वजनिक उपयोग कब वापस मिलेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की समस्या का समाधान करेंगे, या फिर यह तालाब रास्ता बंद होने के कारण धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार होता रहेगा?

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