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अमलेश्वर नगर पालिका में विवाद गहराया: बजट अटका, आय-व्यय पर पारदर्शिता की मांग तेज

अमलेश्वर : दुर्ग जिला अंतर्गत नगर पालिका परिषद अमलेश्वर की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर के आम नागरिकों में नाराजगी और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और विकास कार्यों की अनदेखी हो रही है।

बताया जा रहा है कि 25 मार्च को नगर पालिका की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें नगर के विकास से जुड़े विभिन्न एजेंडों पर चर्चा और सहमति बननी थी। लेकिन बैठक के दौरान उपाध्यक्ष ओमप्रकाश साहू के नेतृत्व में नौ पार्षदों ने आय-व्यय की जानकारी, अतिक्रमण पर कार्रवाई और प्लेसमेंट कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए। संतोषजनक जवाब न मिलने पर पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।

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स्थिति और गंभीर तब हो गई जब बहिष्कार के बाद भी सत्ता पक्ष के पार्षदों और अध्यक्ष की उपस्थिति के बावजूद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) द्वारा बैठक का संचालन नहीं किया गया और उसे स्थगित कर दिया गया। इस मामले का अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे नगर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्ष 2026-27 का बजट अब तक पारित नहीं हो सका है, जो नगर के विकास कार्यों में बड़ी बाधा बन रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नगर के विकास के लिए जिम्मेदार कौन है और जनप्रतिनिधि एकजुट क्यों नहीं हो पा रहे हैं। यह भी चर्चा है कि क्या सीएमओ जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करने में असफल साबित हो रहे हैं।

इधर, 13 अप्रैल को दुर्ग सांसद विजय बघेल के मुख्य आतिथ्य में, जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक और नगर पालिका अध्यक्ष दयानंद सोनकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में लगभग 3 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमि पूजन किया गया। हालांकि, इस कार्यक्रम में सत्ता पक्ष के ही कई पार्षदों की अनुपस्थिति ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

नगरवासियों का कहना है कि अमलेश्वर, रायपुर के नजदीक होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। “ट्रिपल इंजन सरकार” से विकास की उम्मीदें थीं, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए लोगों में निराशा बढ़ रही है।

वर्जन: “25 मार्च की सामान्य सभा में हमने सीएमओ से आय-व्यय की जानकारी और अवैध कब्जों पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन जानकारी देने से इंकार कर दिया गया। इसी कारण बैठक का बहिष्कार किया गया। दुर्भाग्यपूर्ण है कि लिखित आवेदन देने के बाद भी आज तक आय-व्यय का विवरण सहित अन्य मुद्दे की विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।”उपाध्यक्ष ओमप्रकाश साहू।

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