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दुर्ग ब्रेकिंग: 110 एकड़ कोटवारी जमीन की खरीद-फरोख्त का खुलासा, रजिस्ट्री निरस्त कराने कोर्ट पहुंचा प्रशासन

दुर्ग। जिले में कोटवारी सेवा भूमि की खरीद-फरोख्त का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की जांच में जिले की 6 तहसीलों के 51 गांवों में 107 खसरों की जमीन के क्रय-विक्रय में अनियमितताएं उजागर हुई हैं। करीब 110 एकड़ कोटवारी जमीन की खरीद-फरोख्त के मामले में प्रशासन ने अब कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। जमीन के विक्रय पत्रों को अवैध एवं शून्य घोषित कराने और रजिस्ट्री निरस्त करने के लिए न्यायालय में 75 प्रकरण दायर किए गए हैं।

प्रशासन की जांच में सामने आया है कि सेवा भूमि के रूप में दर्ज कोटवारी जमीन का विक्रय किया गया। नियमानुसार सेवा भूमि की प्रकृति और उस पर लागू कानूनी प्रतिबंधों को देखते हुए इन सौदों की वैधता पर सवाल उठे हैं। इसी के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित जमीनों के विक्रय पत्रों को निरस्त कराने के लिए न्यायालय का रुख किया है।

51 गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त उजागर

जिले की छह तहसीलों के अंतर्गत 51 गांवों में 107 खसरों की कोटवारी जमीन की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। प्रशासन ने इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए न्यायालय से संबंधित विक्रय पत्रों को अवैध और शून्य घोषित करने की मांग की है। साथ ही विवादित जमीनों पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने और हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग भी की गई है, ताकि न्यायालय के अंतिम निर्णय तक जमीन की स्थिति में बदलाव न हो।

पाटन तहसील में 17 गांवों का मामला

इस पूरे मामले में पाटन तहसील से भी जमीन की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी सामने आई है। यहां 17 गांवों में लगभग 11 हेक्टेयर कोटवारी जमीन के विक्रय का मामला उजागर हुआ है। यह मामला क्षेत्र में सेवा भूमि के संरक्षण और राजस्व अभिलेखों की वैधानिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कोटवारों के खिलाफ 29 अनुशासनात्मक प्रकरण

सेवा भूमि की बिक्री से जुड़े मामलों में संबंधित कोटवारों के खिलाफ प्रशासन ने 29 अनुशासनात्मक प्रकरण भी दर्ज किए हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ न्यायालय में दायर मामलों के जरिए जमीन के अवैध हस्तांतरण को कानूनी रूप से चुनौती दी जा रही है।

अब न्यायालय के फैसले पर नजर

जिला प्रशासन ने स्पष्ट रूप से विवादित जमीनों की रजिस्ट्री निरस्त कराने तथा जमीन पर निर्माण और अन्य हस्तक्षेप रोकने की मांग की है। अब इन प्रकरणों में न्यायालय का निर्णय महत्वपूर्ण होगा। यदि विक्रय पत्र अवैध घोषित होते हैं, तो संबंधित जमीनों की कानूनी स्थिति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल, कोटवारी सेवा भूमि की खरीद-फरोख्त का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन की कानूनी कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर न्यायालय के फैसले पर टिकी है।

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