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भारतीय ऊर्जा परिदृश्य :2047 पर जोन स्तरीय राष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी आयोजित

अमलेश्वर। शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, शंकर नगर, रायपुर में जोन स्तरीय राष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी 2026 का आयोजन “भारतीय ऊर्जा परिदृश्य 2047: संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ” विषय पर किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम प्रतिभागियों का पंजीयन हुआ। इसके पश्चात सरस्वती पूजन, वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद एवं बलौदाबाजार जिलों के आठ बाल वैज्ञानिकों ने मार्गदर्शक शिक्षकों के साथ सहभागिता की।

महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती शेफाली मिश्रा ने अपने उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में, जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब देश का ऊर्जा परिदृश्य कैसा होना चाहिए, इस पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। उन्होंने ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर बल दिया। छत्तीसगढ़ के विशेष संदर्भ में उन्होंने सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर क्रमिक रूप से आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इसके पश्चात निर्णायक मंडल के सदस्यों ने अपना स्थान ग्रहण किया तथा लॉटरी पद्धति से बाल वैज्ञानिकों की प्रस्तुतियों का क्रम निर्धारित किया गया।

विचार-मंथन सत्र में निर्णायक मंडल के सदस्य श्री के. के. शुक्ला एवं श्री शांतनु विश्वास तथा डॉ. सुशील जैन ने बाल वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन किया। श्री शुक्ला ने नवाचार, स्वतंत्र अभिव्यक्ति एवं ऊर्जा संरक्षण पर बल दिया। श्री विश्वास ने बाल वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास तथा मार्गदर्शक शिक्षकों के परिश्रम की सराहना की। डॉ. जैन ने बाल वैज्ञानिकों को जुझारू एवं कर्मठ बताते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

संगोष्ठी में रायपुर से वैष्णवी टंडन एवं नूरी शिफा, महासमुंद से जान्ह्वी साहू एवं समीर चंद्राकर, गरियाबंद से चांदनी सेन एवं बम्लेश्वरी नेताम तथा बलौदाबाजार से भव्य मिश्र एवं ज्योति साहू ने भाग लिया।

परिणाम एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में विज्ञान प्रभारी श्रीमती मंजूषा तिवारी द्वारा परिणामों की घोषणा की गई ।संगोष्ठी के परिणामों में दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, भाटापारा के बाल वैज्ञानिक भव्य मिश्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि रायपुर की वैष्णवी टंडन द्वितीय स्थान पर रहीं। अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना एवं सहभागिता पुरस्कार प्रदान किए गए। निर्णायक मंडल के सभी सदस्यों को स्मृति चिह्न तथा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में प्राध्यापकगण श्रीमती कल्पना देशमुख,श्रीमती अनुपमा अंबष्ट,श्री सतीश तिवारी, डॉ. सीमा अग्रवाल, श्रीमती सपना शुक्ला, श्रीमती पूनम साहू, सुश्री कविता कृपलानी, श्रीमती किरणजोत बदेशा, डॉ. भावना बैरागी, डॉ. स्वीटी चंद्राकर,श्रीमती सुमन सिंह, श्रीमती रुखमणी सोनी एवं श्रीमती सीमा शर्मा सहित सेवानिवृत्त सहायक प्राध्यापक श्री केश रंजन दास तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं एम.एड,बी.एड. के प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में विज्ञान प्रभारी श्रीमती संगीता कर्मकार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संगोष्ठी ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार तथा ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने का संदेश दिया।

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