देवकर नगर पंचायत में भूचाल, अध्यक्ष सुरेश सिहोरे आमरण अनशन पर

देवकर/बेमेतरा। नगर पंचायत देवकर में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेश सिहोरे अपने ही प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) केश राम साहू पर विभिन्न मामलों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए देवकर बस स्टैंड पर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। अध्यक्ष ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक बेमेतरा और देवकर पुलिस चौकी को सूचना देने की बात कही है।
अध्यक्ष सुरेश सिहोरे ने 2 अप्रैल को जारी मांग पत्र में नगर पंचायत के कामकाज, निर्माण कार्यों, प्रधानमंत्री आवास योजना और खरीदी प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध जांच, निलंबन और कथित वित्तीय अनियमितताओं की राशि की वसूली की मांग की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितता का आरोप
अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि वार्ड क्रमांक 5 के हितग्राही अन्य अग्रवाल को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वार्ड क्रमांक 2 स्थित संयुक्त पारिवारिक भूमि पर आवास निर्माण के माध्यम से दिया गया, जो उनके अनुसार नियमों के विपरीत है। इसके अलावा नगर पालिका अधिनियम की धारा 84 का उल्लंघन कर एक पार्षद के पुत्र को भवन अनुज्ञा पत्र जारी करने का आरोप भी लगाया गया है।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
मांग पत्र में एनजीटी के बफर जोन में तालाब किनारे सीसी रोड निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। वहीं, वार्ड क्रमांक 6 स्थित मुक्तिधाम में अहाता निर्माण के दौरान स्थानीय घाट की रेत, जंग लगी सरिया और क्षतिग्रस्त ईंटों के उपयोग का दावा करते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं।
बैठक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति
अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि सामान्य परिषद की बैठक की सूचना दिए बिना बैठक आयोजित की गई और उन्हें आवश्यक दस्तावेजों से दूर रखा गया। इसके साथ ही भवन अनुज्ञा को मनमाने ढंग से निरस्त करने तथा चतुर्थ श्रेणी के वाहन चालक सोहन साहू को जनसूचना अधिकारी और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण प्रभार सौंपे जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। अध्यक्ष का दावा है कि इससे शासन को वित्तीय नुकसान हो सकता है।
शिकायत की जांच से पहले खंडन जारी करने का आरोप
मांग पत्र में 23 फरवरी को की गई शिकायत का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि जांच पूरी होने से पहले ही प्रभारी CMO ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर को काल्पनिक बताते हुए खंडन प्रतिवेदन जारी कर दिया। अध्यक्ष ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है।
मिनी लोडर खरीदी में कीमत को लेकर सवाल
अध्यक्ष ने सबसे गंभीर आरोप आचार संहिता के दौरान मिनी लोडर की खरीदी को लेकर लगाया है। उनके अनुसार, लगभग 13.50 लाख रुपये कीमत का मिनी लोडर जेम पोर्टल के माध्यम से 22.50 लाख रुपये में खरीदा गया। उन्होंने इस खरीदी की प्रक्रिया, दर और वित्तीय लेनदेन की जांच कराने की मांग की है।
जांच में उपस्थित रहने की अनुमति भी मांगी
नगर पंचायत अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई करने तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं की राशि की वसूली की मांग की है। साथ ही उन्होंने जांच प्रक्रिया के दौरान स्वयं उपस्थित रहने की अनुमति देने का भी आग्रह किया है।
अब इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। हालांकि, मांग पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।



