कुम्हारी में फिर ‘साव’ — लेकिन अफसर तो वही, अंदाज़ भी वही!
अटल परिसर का लोकार्पण और महाविद्यालय भवन का भूमिपूजन — उपमुख्यमंत्री आ रहे हैं, पर अफसरों को क्या फर्क पड़ता है?

कुम्हारी/ कुम्हारी में एक बार फिर से राजनीतिक चहल-पहल का माहौल है। गुरुवार को उपमुख्यमंत्री डॉ. अरुण साव अटल परिसर का लोकार्पण और स्व. बिंदेश्वरी बघेल शासकीय महाविद्यालय भवन निर्माण का भूमिपूजन करने आ रहे हैं।
सरकारी पोस्टर लग चुके हैं, कुर्सियाँ सज रही हैं, मंच तैयार है — पर एक सवाल अब भी मंडरा रहा है —
क्या इस बार भी किसी अधिकारी पर गिरेगी गाज, या सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर चल पड़ेगा?



पिछले दौरे की गूंज अब भी बाकी
याद कीजिए, ठीक पांच महीने पहले जब डॉ. साव कुम्हारी आए थे, तो नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ पर कार्य में अनियमितता का मामला गर्माया।
उपमुख्यमंत्री ने मौके पर ही निलंबन का आदेश थमा दिया — मानो संदेश साफ था कि “लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
लेकिन हुआ क्या?
सीएमओ साहब ने आदेश को भी “सलाह” मान लिया — निलंबन को ‘निलंबित’ कर दिया और आज तक यहीं जमे हुए हैं!
अफसरशाही का नया मॉडल – “साव से पहले ही सावधान”
कुम्हारी के गलियारों में इन दिनों एक नया ट्रेंड चल पड़ा है –
“आदेश चाहे मंत्री का हो, अमल हमारा होगा।”
कहते हैं, सत्ता बदलती है, पद बदलते हैं, लेकिन कुम्हारी के अफसरों की ठसक नहीं बदलती।
उपमुख्यमंत्री आएंगे, भाषण होगा, स्वागत-सत्कार होगा, फिर सब कुछ वहीं लौट आएगा जहां से शुरू हुआ था –
फाइलें वही, बहाने वही, और सिस्टम वही।
नगर के लोग बोले – आदेश नहीं, अफसरों की ‘मर्जी’ चलती है
कुम्हारी के भीतर अब एक कहावत चल पड़ी है –
“यहां कोई भी आदेश निकले, चलेगी तो सीएमओ की ही।”
स्थानीय सत्ता पक्ष के लोग भी दबी जुबान में यही कहते दिखते हैं –
“उपमुख्यमंत्री जी चाहे कुछ भी कह दें, यहां की ‘सरकारी मर्जी’ अलग ही होती है।”
नगर पालिका का आलम यह है कि मानो हर अफसर अपनी ही सरकार हो —
किसी को आदेश की परवाह नहीं, किसी को अनुशासन की चिंता नहीं।
सब अपने ही हिसाब से ‘लोकतंत्र’ चला रहे हैं — और जनता देख रही है तमाशा!
अब फिर आएंगे साव – देखना है ‘सावधानी’ कौन बरतता है
गुरुवार को जब उपमुख्यमंत्री मंच पर होंगे, तो तालियाँ जरूर बजेंगी —
पर दिलों में डर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास होगा कि
“यहां किसी का आदेश नहीं, केवल हमारा रवैया चलता है।”
नगरवासी तो अब व्यंग्य में कहते हैं –
“कुम्हारी में साव आते हैं, पर सावधान कोई नहीं होता।”
कुम्हारी इस वक्त ‘अधिकारियों का नगर’ बन चुका है —
जहां मंत्री आते हैं, आदेश देते हैं, और लौट जाते हैं,
पर यहां के अफसर वही करते हैं, जो उन्हें करना होता है।
अब देखना यह है कि इस बार ‘साव’ के आदेश कितनी दूर तक जाते हैं — फाइल तक, या फिर बस फोटो तक!



