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तेलीगुण्डरा की सखी महिलाओं ने बटन मशरूम को बनाया अपनी सशक्त पहचान -मशरूम उत्पादन कर ‘मास्टर ट्रेनर’ बनीं दुर्ग की ग्रामीण महिलाएं

दुर्ग, 14 मार्च 2026/ दुर्ग जिले में नारी शक्ति समाज की पुरानी सोच को बदल रही है। ग्राम तेलीगुण्डरा की ’’सखी महिला स्व सहायता समूह’’ की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी किसी से पीछे नहीं हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत प्रेरित होकर इन महिलाओं ने बटन मशरूम उत्पादन का बीड़ा उठाया और आज वे अपने काम के दम पर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

इस समूह में कुल 12 महिलाएं शामिल हैं, जो मशरूम उत्पादन के कार्य में जुटी हुई हैं। शुरुआत में एक उपयुक्त स्थान की चुनौती थी, जिसे ग्राम पंचायत के सरपंच ने भवन उपलब्ध कराकर दूर किया। आज आधुनिक उपकरणों और बेहतर प्रबंधन के जरिए ये महिलाएं सफलतापूर्वक मशरूम उगा रही हैं। शुरुआती दौर में केवल 45 बैग से शुरू हुआ यह सफर आज सालाना 80 हजार रुपये की शुद्ध आय तक पहुँच गया है। इससे इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें अपने ही गाँव में रोजगार के नए अवसर भी मिले हैं।

सखी स्व सहायता समूह की यह सफलता केवल आमदनी तक सीमित नहीं है। समूह को प्राप्त 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि का उपयोग महिलाएं अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर रही हैं। सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि कभी खुद ट्रेनिंग लेने वाली ये महिलाएं आज इतनी सशक्त हो गई हैं कि वे ’मास्टर ट्रेनर’ के रूप में दूसरी ग्राम पंचायतों के समूहों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। बिहान योजना के अधिकारियों के सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर, ये महिलाएं आज गर्व के साथ अपने पैरों पर खड़ी हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

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