बोरी सामुदायिक केंद्र में महिला सर्जन की कमी से गर्भवती महिलाओं की बढ़ी परेशानी
दुर्ग। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोरी में स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं महिला सर्जन नहीं होने के कारण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को लंबे समय से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव (सीजेरियन) की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रसव के समय महिलाओं को रात-बेरात दुर्ग अथवा कचान्दुर रेफर कर दिया जाता है। इससे जच्चा-बच्चा के साथ परिजनों को भी मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है।
बोरी के 20 बिस्तर वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के करीब 20 से 25 गांवों की बड़ी आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निर्भर है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सामान्य मामलों में भी मरीजों को दुर्ग रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। रात के समय मरीजों को लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस दौरान उनके साथ मितानिनों को भी कई बार रात-बेरात जाना पड़ता है, जिससे गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार, यदि दुर्ग जिला अस्पताल पहुंचने पर बेड उपलब्ध नहीं होता तो मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है। ऐसी स्थिति में जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर खतरा मंडराने की आशंका बनी रहती है। इस गंभीर समस्या से कई बार सांसद एवं विधायक को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद सुविधा का लाभ नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि बोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध है, लेकिन उसका उपयोग नहीं होने से मशीन जंग खा रही है। गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए भी दुर्ग जाना पड़ता है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख को की जाती है, लेकिन महिला चिकित्सा विशेषज्ञ और सीजेरियन सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को निराश होकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में पर्याप्त महिला चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा कम होता जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
आंदोलन की तैयारी में सरपंच और ग्रामीण
बोरी सहित आसपास के गांवों के सरपंचों एवं ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब वर्षों से मांग करने के बावजूद महिला सर्जन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो रही है, तो अब आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से बोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं महिला सर्जन की नियुक्ति, सीजेरियन प्रसव की सुविधा शुरू करने तथा सोनोग्राफी मशीन को चालू कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि प्रसव के समय महिलाओं को अनावश्यक रूप से दूर-दराज के अस्पतालों में रेफर न करना पड़े और समय पर उपचार मिल सके।
वहीं, ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जन औषधि केंद्र संचालित है, जहां दवाइयां प्रिंट रेट पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में यदि अस्पताल में विशेषज्ञ महिला चिकित्सक और आवश्यक उपचार सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो आसपास के 20 से 25 गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।



