भव्य समारोह के साथ भोजली विसर्जन एवं प्रतियोगिता संपन्न, “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” की गूंज
भोजली उत्सव ने दिया छत्तीसगढ़ी संस्कृति, आस्था और भाईचारे का संदेश

भिलाई–3: नगर पालिक निगम भिलाई–चरोदा स्तरीय भोजली उत्सव एवं विसर्जन समारोह का आयोजन भोजली उत्सव समिति के मुख्य संयोजक एवं भाजपा जिला भिलाई के प्रवक्ता प्रेम लाल साहू के मुख्य संयोजकत्व में तथा संस्कृति सहयोगी राम कुमार वर्मा (राष्ट्रपति से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक) के विशेष सहयोग से भव्य एवं समारोहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में 40 वार्डों की सहयोगी माता-बहनों एवं कार्यकर्ताओं की सहभागिता ने भोजली पर्व को जन-जन का उत्सव बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राकेश पाण्डेय (अध्यक्ष–खादी तथा ग्रामोद्योग, छत्तीसगढ़ शासन) थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीता साहू (पूर्व अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद भिलाई–चरोदा) ने की।
विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुषमा जेठानी (अध्यक्ष–सिंधी अकादमी, छत्तीसगढ़ शासन), गुलशन ढिंढे (वरिष्ठ भाजपा नेता), राम खिलावन वर्मा (नेता प्रतिपक्ष, नपा नि भिलाई–चरोदा), चंद्र प्रकाश पांडेय (उप नेता प्रतिपक्ष नपा भिलाई–चरोदा), प्रेमलता चंद्राकर (पार्षद वार्ड क्रमांक 15), शिवकुमारी यादव (पार्षद–देवबलौदा), ए गौरी शंकर (अध्यक्ष भाजपा चरोदा मंडल), रवि नाहर (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भाजपा भिलाई–3 मंडल) तथा महेश सोना (अध्यक्ष–पश्चिम उत्तकल गांडा समाज भिलाई–चरोदा) उपस्थित रहे।
विशेष अतिथियों में शुभम चिंचुलकर (जिला उपाध्यक्ष–भाजयुमो भिलाई), समीर अग्रवाल (महामंत्री–भाजपा भिलाई–3 मंडल), पूर्णिमा ठाकुर (महामंत्री–भाजपा चरोदा मंडल), गीता वर्मा (कन्या शक्ति संयोजिका, भाजयुमो जिला भिलाई), पद्मिनी साहू (अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा भिलाई–3 मंडल), शिवा पटनायक (उपाध्यक्ष–भाजपा चरोदा मंडल), परमजीत सिंह (उपाध्यक्ष–भाजपा चरोदा मंडल), डी. वेंकट राव (पूर्व पार्षद) तथा जसवंत वर्मा (वरिष्ठ भाजपा नेता) उपस्थित रहे।
अतिथियों ने छत्तीसगढ़ महतारी के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात राम कुमार वर्मा द्वारा लिखित “भोजली” पुस्तक का विमोचन किया गया। सभी अतिथियों को मुख्य संयोजक प्रेम लाल साहू द्वारा छत्तीसगढ़ी गमछा पहनाकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि राकेश पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भोजली केवल धार्मिक या पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, कृषि संस्कृति, प्रकृति, आस्था और आपसी भाईचारे से जुड़ा लोकपर्व है। भोजली में हमारी माताओं और बहनों की श्रद्धा, किसान की मेहनत तथा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव समाहित है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हमारी नई पीढ़ी अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति से जुड़े। जब हम अपनी जड़ों को मजबूत करेंगे, तभी हमारी संस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचेगी। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी सरलता, सहजता, मेहनत, आपसी प्रेम और समृद्ध लोक संस्कृति से है।
उन्होंने पूरे उत्साह के साथ कहा—“हमारी बोली पर गर्व, हमारी संस्कृति पर गर्व और हमारी माटी पर गर्व—इसीलिए छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया।”
उन्होंने भोजली उत्सव समिति द्वारा भिलाई–चरोदा के 40 वार्डों को जोड़कर आयोजित किए गए इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
अध्यक्षता कर रहीं सीता साहू ने कहा कि भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति की श्रद्धा और लोक जीवन की आत्मीयता का प्रतीक है। भोजली के माध्यम से हमारी माताएं-बहनें प्रकृति और अन्नदाता के प्रति सम्मान व्यक्त करती हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में अपनी परंपराओं को जीवंत रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। भोजली उत्सव जैसे आयोजन हमारी बेटियों और युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि भोजली के पौधे की तरह ही हमारे समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की हरियाली सदैव बनी रहे, यही इस पर्व का संदेश है।
प्रतियोगिता एवं विसर्जन ने बढ़ाया उत्साह
समारोह के दौरान विभिन्न वार्डों से आई भोजली की प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें पांच टोली को पुरस्कृत किया गया। प्रतिभागियों ने पारंपरिक रूप से तैयार की गई भोजली के साथ अपनी श्रद्धा और सांस्कृतिक भावनाओं का प्रदर्शन किया।
निर्णायक सेवती वर्मा, तारा वर्मा एवं लोधी समाज की महिला प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मी जंघेल के निर्णय अनुसार प्रेम लाल साहू के सौजन्य से प्रतियोगिता में प्रथम भारती पटेल टीम (वार्ड क्रमांक 09/अ), द्वितीय इंदु वर्मा टीम (वार्ड क्रमांक 09/स), तृतीय जमुना बंछोर टीम (वसुंधरा नगर 18), चतुर्थ गीता साहू टीम (शीतला पारा 9/ब) तथा पंचम नम्रता विश्वकर्मा टीम (वार्ड क्रमांक 17) को पुरस्कार प्रदान किया गया।
विशेष परिधान में रीना चंद्राकर टीम (इंदिरा पारा 15) तथा विशेष आकर्षक पुरस्कार के लिए गिरिजा श्रीवास टीम (अकलोरडीह 03), गंगा डोंडेकर टीम (मोरिद 39), पूर्णिमा ठाकुर टीम (चरोदा 23), गायत्री यादव टीम (सिरसकला भाटापारा 37), गायत्री मंजू साहू टीम (डबरापारा 12), कमल तांडी टीम (देवबलोदा), शिवकुमारी यादव टीम (देवबलोदा) एवं दयादास साहू टीम (जी केबिन चरोदा) को सम्मानित किया गया। सभी सहभागी टीमों को प्रोत्साहित करते हुए प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
इसके पश्चात पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं भक्तिभाव के साथ डीजे और भोजली गीतों की धुन पर विसर्जन के लिए शोभायात्रा निकाली गई। उपस्थित महिलाओं ने भोजली गीतों और पारंपरिक मंगल भावनाओं के साथ भोजली माता को विदाई दी।
मुख्य संयोजक प्रेम लाल साहू ने कहा कि 22 अगस्त से 30 अगस्त तक निरंतर सेवा एवं आयोजन की तैयारियों में जुटीं 40 वार्डों की सभी सहयोगी माताओं-बहनों तथा सहयोगी साथियों के अथक परिश्रम और समर्पण के कारण यह आयोजन सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि भोजली उत्सव का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा, आस्था और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
उन्होंने सभी अतिथियों को छत्तीसगढ़ी गमछा भेंट कर सम्मान किया तथा अतिथियों, सहयोगियों, माताओं-बहनों एवं नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और व्यापक एवं भव्य स्वरूप देने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन राम कुमार वर्मा ने किया तथा आभार प्रदर्शन रवि नाहर ने किया।
कार्यक्रम में ज्ञान दास मानिकपुर, लाखन वर्मा, थानेश्वर साहू, पुखराज जैन, सुरेंद्र देवांगन, नरोत्तम साहू, तोरण सोनी, आचार्य हरीश साहू, दयादास साहू, कमल तांडी, मनोज तांडी, योगेश यादव, संजू सोनी, हरी लाल सोनी, वोमन निर्मलकर, हुपेंद्र चंद्रा, निशांत जोशी, पिंटू दीवारे, घांसी साहू, अवध राम साहू, बल्लू कुर्रे, प्रदीप यादव, शकुन देवांगन, रीना चंद्राकर, निर्मला भारती, गायत्री यादव, त्रिवेणी वर्मा, नम्रता विश्वकर्मा, किरण ठाकुर, गिरिजा श्रीवास, द्रोपती वर्मा, कुसुम साहू, ऊषा चौहान, रंजना सिंह, हीरा साहू, गायत्री साहू, मंजू साहू, भारती साहू, गंगा डोंडेकर, थानेश्वरी साहू, ऊषा साहू, हीरावती सोनी, बनिता नाग, स्वाति वर्मा, उमेश्वरी साहू, जमुना बंछोर, अनूपा विश्वकर्मा, स्वाति चंद्राकर एवं पुष्पा बया सहित बड़ी संख्या में नागरिक, माताएं-बहनें, युवा, भाजपा कार्यकर्ता एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।






