ग्राम पंचायतों के बकाया बिजली बिल पर सरपंच संघ ने जताई चिंता, कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के 11,337 सरकारी विभागीय कार्यालयों पर कुल 23,509.59 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसमें सर्वाधिक बकाया 8,219 ग्राम पंचायतों के बिजली कनेक्शनों पर 14,446.60 लाख रुपये बताया गया है। बकाया बिजली बिल के चलते दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत रिसामा, चिरपोटी, मतवारी, अंडा, अछोटी, जजंगिरी सहित आसपास के कई गांवों के पंचायत भवनों में बिजली कनेक्शन काटे जाने से जनप्रतिनिधियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी समस्या को लेकर प्रदेश सरपंच संघ प्रभारी एवं सरपंच संघ अध्यक्ष युगल किशोर साहू, जनपद सरपंच संघ अध्यक्ष ढालेश साहू, जनपद पंचायत दुर्ग, सचिव अनिल बंजारे सहित बड़ी संख्या में सरपंचों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर आवेदन सौंपा। सरपंचों ने शासन से पंचायतों को आवश्यक राशि उपलब्ध कराने तथा बिजली कटौती की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
15 वर्षों का बकाया पंचायतों के लिए चुकाना संभव नहीं : युगल किशोर साहू
प्रदेश सरपंच संघ प्रभारी छत्तीसगढ़ युगल किशोर साहू ने कहा कि वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सामने पिछले लगभग 10 से 15 वर्षों से चले आ रहे बिजली बिल के बकाये का भुगतान करना संभव नहीं है। पंचायतों के पास इतनी बड़ी राशि जमा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। शासन को पंचायतों के लिए आवश्यक फंड उपलब्ध कराना चाहिए, तभी विद्युत विभाग को बकाया राशि का भुगतान पंचायतों द्वारा किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायत भवनों की बिजली काटे जाने से पंचायतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। आज के समय में लगभग हर सरकारी कार्य ऑनलाइन पोर्टल, कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से होता है। ऐसे में बिजली के अभाव में पंचायत भवनों में कामकाज ठप होना गंभीर चिंता का विषय है।
युगल किशोर साहू ने कहा कि एक तरफ देश को विकसित और संचार क्रांति से जोड़ने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत भवनों में बिजली नहीं होने से जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आगे चलकर गांवों की गली लाइट, मोटर पंप आदि के बिजली कनेक्शन भी काटे जाते हैं तो इसकी जवाबदारी किसकी होगी?
उन्होंने कहा कि यदि गली की लाइटें बंद रहेंगी और बिजली के अभाव में मोटर पंप नहीं चल पाएंगे तो ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने में भी परेशानी होगी। ऐसे हालात में गांवों का विकास कैसे संभव होगा।
सरपंच संघ ने शासन से मांग की है कि पंचायतों के वर्षों पुराने बकाया बिजली बिल के संबंध में पंचायत हित में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा आवश्यक राशि उपलब्ध कराई जाए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया और पंचायतों के हित में उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो छत्तीसगढ़ प्रदेश सरपंच संघ द्वारा अतिशीघ्र ठोस कदम उठाया जाएगा।






