प्रधानमंत्री आवास का सपना हो सकता है अधूरा – ढालेश साहू, राज्य बजट में पिछले साल की तुलना में 55 प्रतिशत की कटौती


दुर्ग। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण के लिए ₹4,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसी योजना के लिए ₹8,500 करोड़ का बजट रखा गया था। लगभग 55 प्रतिशत की यह कटौती ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
आवास अधिकार कार्यकर्ता व जनपद सदस्य ढालेश साहू ने कहा कि* ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार कच्चे या जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। कई हितग्राहियों को स्वीकृति मिलने के बावजूद समय पर किस्त नहीं मिल पा रही है, जिससे निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। ऐसे समय में बजट में भारी कमी यह संकेत देती है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वास्तव में आवास की मांग समाप्त हो गई है या योजना की गति धीमी की जा रही है।
कहा कि वर्तमान में “आवास प्लस 2.0” सर्वे के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में नए पात्रों का सर्वेक्षण तो किया जा रहा है, लेकिन उसका कोई स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमा या स्वीकृति संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है। यदि सर्वे लक्ष्य विहीन रहेगा तो हजारों जरूरतमंद परिवार केवल सूची में नाम दर्ज होने तक सीमित रह जाएंगे और उन्हें वास्तविक स्वीकृति का लाभ नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने मांग की कि सरकार आवास प्लस 2.0 सर्वे की पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक करे, पात्र परिवारों की अंतिम सूची घोषित करे तथा बजट प्रावधान के अनुरूप स्वीकृतियों की स्पष्ट संख्या जारी करे। साथ ही लंबित किस्तों का त्वरित भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी गरीब परिवार पक्के मकान के अपने अधिकार से वंचित न रहे।








