झीट–महुदा के बीच संचालित लाल ईंट भट्ठों से बढ़ा प्रदूषण, नहर-नाली क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों में आक्रोश

अम्लेश्वर, पाटन। पाटन विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों में संचालित लाल ईंट भट्ठों के कारण प्रदूषण, पर्यावरण की बदहाल स्थिति तथा सिंचाई व्यवस्था को नुकसान पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी वाहनों के लगातार आवागमन से सड़कें और किसानों की सिंचाई के लिए बनी नहर-नालियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जबकि पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों के अनुसार झीट और महुदा के बीच संचालित लाल ईंट भट्ठे के आसपास पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। बारिश के मौसम में भी भट्ठा संचालकों द्वारा पौधारोपण नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के प्रयास नजर नहीं आते। वहीं, किसानों की सिंचाई के लिए निर्मित नहर-नालियों का उपयोग परिवहन मार्ग के रूप में किए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है, जिससे उनकी संरचना को नुकसान पहुंच रहा है।



बताया जा रहा है कि लगभग दो माह पूर्व बारासत के पहले ग्राम महुदा के ग्रामीणों ने धूल और धुएं से होने वाली परेशानियों के विरोध में प्रदर्शन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपा था। शिकायत के बाद नायब तहसीलदार पाटन ने मौके का निरीक्षण किया था और भट्ठा संचालक को सड़क किनारे से भट्ठा हटाने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए थे। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद आज भी भट्ठा उसी स्थान पर संचालित हो रहा है और स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्ठों के संचालन की जांच कर पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाए, क्षतिग्रस्त सड़कों और नहर-नालियों की मरम्मत कराई जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो समस्या और गंभीर हो सकती है।



