विजयादशमी पर्व सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक : कल्पना नारद साहू

जामगांव आर। पाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 12 की जिला पंचायत सभापति दुर्ग श्रीमती कल्पना नारद साहू ने विजयादशमी पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दशहरा यानी विजयादशमी भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया था, वहीं मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी थी।
श्रीमती साहू ने कहा कि दशहरे का सबसे प्रमुख प्रसंग रामायण से जुड़ा है। भगवान श्रीराम की रावण पर विजय यह संदेश देती है कि अधर्म, अहंकार और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। इसी प्रकार, मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध अन्याय, अत्याचार और नकारात्मक शक्तियों के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर देशभर में भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना श्रद्धा एवं भक्तिभाव से की जाती है। अनेक स्थानों पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। यह परंपरा समाज को बुराइयों का त्याग कर सत्य, सदाचार और सद्भाव के मार्ग पर चलने का संदेश देती है।
श्रीमती कल्पना नारद साहू ने कहा कि दशहरा केवल उत्सव मनाने का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मसुधार का भी महत्वपूर्ण अवसर है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने अधर्म पर विजय प्राप्त की और मां दुर्गा ने अन्याय का अंत किया, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और द्वेष जैसी बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। जीवन में सत्य, संयम, करुणा और सदाचार को अपनाकर ही वास्तविक सफलता प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी का वास्तविक महत्व केवल रावण के पुतले का दहन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करना ही इस पर्व का मूल उद्देश्य है। जब व्यक्ति अपने आचरण में सत्य, धर्म, प्रेम और सामाजिक सद्भाव को स्थान देता है, तभी विजयादशमी का संदेश सार्थक होता है।
अंत में श्रीमती साहू ने कहा कि विजयादशमी हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सत्य के मार्ग पर चलने और समाज में प्रेम, भाईचारा एवं सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देती है। हमें इस पावन पर्व पर बुराइयों का त्याग कर एक बेहतर समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने का संकल्प लेना चाहिए। यही विजयादशमी का शाश्वत संदेश है।



