खुले में शराबखोरी से पर्यावरण पर संकट, सड़क किनारे बिखरी शराब की बोतलें और डिस्पोजल

पाटन,दुर्ग। खुले में शराब सेवन करने की प्रवृत्ति अब पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। शराब सेवन के बाद खाली सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलें, पानी के पाउच, झिल्लियां और डिस्पोजल सड़क किनारे ही फेंक दिए जा रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पाटन विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जामगांव एम से रूही पहुंच मार्ग पर देखने को मिला है, जहां सड़क किनारे स्थित पुलिया के पास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की शराब की बोतलें, झिल्लियां और डिस्पोजल बिखरे पड़े हैं।
सड़क किनारे फैली यह गंदगी न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि आसपास स्थित किसानों के खेतों की जमीन को भी दूषित करने का खतरा पैदा कर रही है। हवा और बारिश के पानी के साथ ये प्लास्टिक कचरे खेतों तक पहुंच सकते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।


एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार धरती बचाव अभियान के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कर रही है। किसानों को रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग के प्रति समझाइश दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर खुले में शराब सेवन करने वाले लोगों की लापरवाही इन प्रयासों पर पानी फेरती नजर आ रही है।
स्थानीय स्तर पर खुले में शराब सेवन करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसे लोगों के हौसले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। शराब सेवन के लिए सड़क किनारे पुलिया और सुनसान स्थानों को अड्डा बना लिया जाता है। इसके बाद खाली बोतलें, पानी के पाउच और डिस्पोजल वहीं छोड़कर चले जाते हैं। इसका खामियाजा पर्यावरण और आसपास के किसानों को भुगतना पड़ सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग और खुले में शराब सेवन पर निगरानी रखने वाले जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब जागेंगे? ग्रामीणों एवं किसानों के हित में जामगांव एम–रूही मार्ग पर फैले प्लास्टिक कचरे की सफाई कराने तथा खुले में शराब सेवन कर गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता है।



