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अण्डा सहकारी बैंक जलमग्न, किसानों की परेशानी चरम पर – जनपद सदस्य ढालेश साहू ने प्रशासन को घेरा

अंडा: दुर्ग जिला अंतर्गत अण्डा सहकारी बैंक जलमग्न बारिश के शुरुआती दौर में ही जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, दुर्ग की उपशाखा अण्डा जलमग्न हो गई है। बैंक परिसर के सामने पानी भर जाने के कारण न सिर्फ ग्रामीणों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है, बल्कि वहां उपस्थित कर्मचारी और किसान तक प्रभावित हो रहे हैं। कीचड़, गंदे पानी और दुर्गंध के बीच लोग जैसे-तैसे बैंकिंग कार्य संपन्न कर रहे हैं।

बैंक परिसर की यह हालत किसी प्राकृतिक आपदा की नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और स्थायी जल निकासी व्यवस्था के अभाव की देन है। वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

किसानों को हो रही भारी असुविधा

यह शाखा मुख्यतः कृषि ऋण वितरण, बीज एवं खाद के ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएं प्रदान करती है। ऐसे में रोज़ाना सैकड़ों किसान यहां पहुंचते हैं। जलभराव के कारण बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्हें अपने जरूरी कागजात गीले होने से खराब हो जाने का डर बना रहता है!

ढालेश साहू ने उठाई आवाज़

जनपद सदस्य व किसान नेता ढालेश साहू स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा:

“किसानों के नाम पर योजनाएं और घोषणाएं तो बहुत होती हैं, लेकिन जब किसान को वास्तव में सुविधा चाहिए होती है, तो यही सरकारी संस्थान उन्हें गंदे पानी में खड़ा कर देते हैं। यह न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि सरकार की ग्रामीण व्यवस्था के प्रति उदासीनता भी दर्शाता है।

साहू ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर स्थायी जल निकासी योजना बनाने, बैंक परिसर की ऊँचाई बढ़ाने और नाली निर्माण जैसे ठोस कार्यों की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो वह किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।

बैंक प्रबंधन की चुप्पी

जब इस विषय में बैंक कर्मचारियों से पूछा गया, तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे भी वर्षों से इस समस्या को झेल रहे हैं और कई बार उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

एक ओर सरकार डिजिटल बैंकिंग और ग्रामीण विकास की बात करती है, दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत में किसान कीचड़ में फंस कर भी अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। अण्डा उपशाखा की यह स्थिति समूचे व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर किसानों की आवाज़ एक बार फिर अनसुनी रह जाएगी/किसान नेता ढालेश साहू

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