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किसानों की बैठक सम्पन्न, मुख्यमंत्री से मुलाक़ात का निर्णय (400 केवी टावर लाइन मुआवजा विवाद)

दुर्ग : ग्राम मचांदुर में 400 के.वी. ट्रांसमिशन टावर लाइन से प्रभावित किसानों की बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें ग्राम मचांदुर, कातरों और मातरो के सैकड़ों किसान शामिल हुए। जसलोक साहू, रनमत साहू, गजेन्द्र साहू सहित अन्य किसानों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें मुआवज़ा राशि में गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों ने शासन की गाइडलाइन का हवाला देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आदेश क्रमांक GENS-18/1/2025-revenue/7-1, दिनांक 10 मार्च 2025 के अनुसार टावर बेस हेतु भूमि मूल्य का 200 प्रतिशत तथा राइट ऑफ वे कॉरिडोर हेतु 30 प्रतिशत मुआवज़ा मिलना चाहिए। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि उन्हें टावर बेस का केवल 80 प्रतिशत और राइट ऑफ वे का मात्र 15 प्रतिशत ही दिया जा रहा है, जो शासन के आदेश का उल्लंघन है।

इस मामले में दुर्ग सांसद विजय बघेल ने भी 20 अगस्त 2025 को जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर शासन की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके जिला प्रशासन की चुप्पी ने किसानों में असंतोष और आक्रोश को और बढ़ा दिया है।

बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विदेश दौरे से लौटते ही प्रभावित किसान सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय जाकर अपनी समस्याएँ रखेंगे। किसानों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश स्तरीय किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्यभर के किसान शामिल होंगे।

बैठक में किसानों के मार्गदर्शन के लिए जनपद सदस्य एवं किसान नेता ढालेश साहू भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि किसानों को आधा-अधूरा मुआवज़ा देना सीधा अन्याय है। शासन की गाइडलाइन को लागू करना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है और यदि इसमें लापरवाही हुई तो किसान आंदोलन को और व्यापक करेंगे।

इसी दौरान ग्राम कातरों के किसान बीरसिग साहू ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि–
“यह किसानों के लिए एक मानसिक प्रताड़ना है। लाइन चालू होने के बाद भी हमें मुआवज़ा राशि प्राप्त नहीं हुई है, जबकि शासन ने गाइडलाइन स्पष्ट रूप से जारी की है।”उक्त जानकारी किसान नेता ढालेश साहू ने दी है।

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