6 माह बीते – पहली किस्त तक जारी नहीं, 18 लाख आवास का दावा निकला खोखला /ढालेश साहू
प्रधानमंत्री आवास योजना में जिला प्रशासन की घोर विफलता – गरीबों को अब तक नहीं मिला पक्का मकान
दुर्ग 02 सितंबर : प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में जिला प्रशासन की लापरवाही ने गरीब हितग्राहियों के सपनों पर पानी फेर दिया है। वर्ष 2025-26 के लिए जनपद पंचायत दुर्ग को 2306 आवास का लक्ष्य मिला था। इनमें से 1620 आवास पात्र हितग्राहियों को स्वीकृत हुए, लेकिन सितम्बर 2025 तक 6 माह बीतने के बाद भी एक भी मकान का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। यह शासन-प्रशासन की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है।

जनपद सदस्य किसान नेता ढालेश साहू ने उक्त बातें आज एक प्रेस विज्ञप्ति कर कहा है कि नियमों के अनुसार, स्वीकृति आदेश जारी होने के 7 दिन के भीतर पहली किस्त जारी की जानी थी और 12 माह की समय-सीमा (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) में मकान तैयार होना अनिवार्य है। लेकिन आधा समय बीत चुका है और अभी तक नींव भी नहीं डाली गई। इस लापरवाही के कारण गरीब परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में बरसात और कठिन मौसम झेलने को मजबूर हैं। महिला, बच्चे और बुजुर्ग असुरक्षित स्थिति में जी रहे हैं।
योजना में शौचालय निर्माण हेतु ₹12 हजार की अतिरिक्त राशि और ₹70 हजार तक ऋण सुविधा का स्पष्ट प्रावधान है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रशासन ने न तो पहली किस्त जारी की, न ही हितग्राहियों को कोई वास्तविक सुविधा उपलब्ध कराई। इससे साबित होता है कि कागजों पर योजनाओं का ढोल पीटा जा रहा है और गरीबों के साथ खुला धोखा हो रहा है।
गंभीर तथ्य यह भी है कि जिला प्रशासन अभी तक पुराने लक्ष्यों को ही पूरा करने में उलझा हुआ है। मार्च 2025 तक जो आवास निर्माण का लक्ष्य पूरा होना था, उस पर भी आज की तारीख तक करीब 30 प्रतिशत काम शेष पड़ा हुआ है। तय समय-सीमा का लक्ष्य पूरा करने में असफल साबित हुआ जिला प्रशासन अब नए लक्ष्यों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

जनपद सदस्य ढालेश साहू की मांगें :
स्वीकृत 1620 आवासों का निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कराया जाए।,पहली किस्त की राशि शीघ्र जारी की जाए।,अपात्र घोषित किए गए 686 हितग्राहियों की सूची का पुनः परीक्षण कर वास्तविक पात्रों को लाभ दिया जाए।,पुराने लक्ष्य के अधूरे काम को तत्काल पूर्ण किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यदि जनपद पंचायत दुर्ग की यह स्थिति है, तो यह मानना ही होगा कि दुर्ग जिले के अन्य जनपद पंचायतों में भी यही समस्या बड़े पैमाने पर बनी हुई है। प्रशासन को चेताया गया है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सिर्फ कागजों और बैठकों तक सीमित रह जाएगी, और गरीब हितग्राहियों का पक्का मकान पाने का सपना अधूरा रह जाएगा।
इसी मांग को लेकर जिला कलेक्टर दुर्ग को लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया है। अब जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है कि वह तत्काल संज्ञान लेकर गरीब परिवारों को उनका हक दिलाए।








