डेढ़ साल बाद भी विकास कार्य ठप, काम के अभाव में पंचायत कार्यालय छोड़ने को मजबूर सरपंच
पाटन। दुर्ग जिले के जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत आने वाली 108 ग्राम पंचायतों में ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद अधिकांश पंचायतों में विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार शासन-प्रशासन से मांग किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
कामों की स्वीकृति नहीं मिलने से कई ग्राम पंचायतों के सरपंच आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई पंचायतों में आज तक एक रुपये के भी विकास कार्य स्वीकृत नहीं हुए हैं। ऐसे में सरपंच अपने गांवों में विकास कार्य कराने में असमर्थ हैं और रोजी-रोटी की तलाश में अन्य व्यवसाय या रोजगार करने को मजबूर हो गए हैं।

उत्तर पाटन क्षेत्र से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक सरपंच पंचायत कार्यों के अभाव में आजीविका चलाने के लिए दूसरे कार्यों में जुट गए हैं। वहीं दूसरी ओर, ब्लॉक के प्रभावशाली सरपंचों को पहुंच और पकड़ के कारण विकास कार्यों की स्वीकृति मिलने में कोई परेशानी नहीं हो रही है। उनके गांवों में लगातार विकास कार्य संचालित हो रहे हैं और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके विपरीत जिन सरपंचों के पास विकास कार्य नहीं हैं, वे जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कार्य स्वीकृति नहीं मिल पा रही है।
सूत्रों के अनुसार पाटन विधानसभा क्षेत्र में कई विकास कार्य आज भी अधूरे पड़े हुए हैं। वहीं जो कार्य पूर्ण हो चुके हैं, उनका रखरखाव भी नहीं हो पा रहा है। दक्षिण पाटन क्षेत्र में स्थित रानीतराई स्टेडियम इसका उदाहरण है। स्टेडियम का लोकार्पण होने के बाद उसकी उचित देखरेख नहीं की गई, जिसके कारण वह जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।



