अमलेश्वरकुम्हारीखेती किसानी के गोठचरौदाछत्तीसगढ़जामगांव आरदुर्ग भिलाईदेश दुनियाधमतरीपाटनबालोदबिलासपुरभिलाई 3राजनांदगांवरानीतराईरायपुरसेलूद

आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना ही पुनर्वास का उद्देश्य- जेजेबी प्रधान मजिस्ट्रेट भगवान दास पनिका

विधि से संघर्षरत बच्चों के बेहतर पुनर्वास एवं संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार करने जिला स्तरीय अभिसरण की बैठक सम्पन्न

दुर्ग, 23 जुलाई 2026 / कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में विधि से संघर्षरत बच्चों के बेहतर पुनर्वास एवं संरक्षण के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने हेतु जिला स्तरीय अभिसरण की बैठक आज पीडब्ल्यूडी सभागार में आयोजित की गई। जिले में विधि से संघर्षरत बच्चों के बेहतर पुनर्वास एवं संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने, वर्तमान कमियों एवं सहयोग की संभावनाओं की पहचान करने, बच्चों एवं उनके परिवारों को समयबद्ध, समग्र एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है।

बैठक में जेजेबी के प्रधान मजिस्ट्रेट भगवान दास पनिका ने कहा कि बच्चों के समग्र संरक्षण और पुरर्वास के लिए सभी विभागों एवं संस्थाओं के बीच निरंतर सहयोग, समन्वय और साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी हितधारकों से बाल-अनुकूल, संवेदनशील और सशक्त संरक्षण तंत्र विकसित करने के लिए मिलकर कार्य करने का आव्हान किया। उन्होंने बच्चों के लिए बनाए गए कानूनी अधिनियम के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विधि से संघर्षरत बच्चों का पुनर्वास केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व भी है।

Advertisement
Advertisement 1 Advertisement 2 Advertisement 3 Advertisement 4 Advertisement 5 Advertisement 6 Advertisement 7

विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भगवतकार ने कहा कि विधि से संघर्षरत बच्चों के बेहतर पुनर्वास, संरक्षण एवं उनके सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संबंधित विभागों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ऐसे बच्चों के साथ दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए, ताकि वे शिक्षा, परामर्श और कौशल विकास के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें।

Advertisement
Advertisement 1 Advertisement 2 Advertisement 2 Advertisement 3 Advertisement 4 Advertisement 5 Advertisement 6 Advertisement 7 Advertisement 8 Advertisement 9 Advertisement 10 Advertisement 11 Advertisement 12

सीएसजी सीनियर डायरेक्टर उर्वशी तिलक ने बैठक में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, मानसिक एवं सामाजिक परामर्श, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियों के अनुरूप पुनर्वास की कार्ययोजना तैयार कर उसे समयबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही। इस दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने तथा बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। सीएसजी सीनियर डायरेक्टर उर्वशी तिलक ने बताया कि यह पहल वर्तमान में छत्तीसगढ़ के तीन जिलों—रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में प्रारंभ की गई है। इन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां बाल अपराध के मामले अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बैठक के दौरान तीनों जिलों में दर्ज बाल अपराध के आंकड़ों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर पुनर्वास और संरक्षण की कार्ययोजना को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

बैठक में पुलिस विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, श्रम विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, सामाजिक संस्थाएं एवं सीएसआर के प्रतिनिधि, जिला महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी श्री आर.के. जाम्बुलकर, परियोजना समन्वयक श्री चंद्रप्रकाश पटेल सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!