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वुड आइलैंड कॉलोनी अमलेश्वर में, हरेली सावन उत्सव में गूंजा भोजली का लोकसंदेश

अमलेश्वर। छत्तीसगढ़ की माटी, संस्कृति और मितान परंपरा का उत्सव बना आकर्षण का केंद्र, छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं को सहेजने की अनूठी पहल के तहत हरेली सावन उत्सव के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक भोजली पर्व का भी उल्लासपूर्वक आयोजन नगर पालिका परिषद अमलेश्वर क्षेत्र अंतर्गत वुड आइलैंड कॉलोनी में किया गया। आयोजन में महिलाओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भोजली की पारंपरिक विधि एवं लोकरीति के माध्यम से अपनी संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।

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भोजली छत्तीसगढ़ की सिर्फ एक पारंपरिक पूजा या पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, मित्रता, भाईचारे और अपनत्व की जीवंत पहचान है। भोजली के माध्यम से एक-दूसरे को मितान बनाने की परंपरा छत्तीसगढ़ की उस सुंदर सामाजिक भावना को दर्शाती है, जहां रिश्ते केवल परिवार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रेम और विश्वास से नए रिश्ते बनाए जाते हैं।

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कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि “हमार माटी, हमार तिहार” हमारी पहचान है। हमारी लोकपरंपराएं हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचें और युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति, बोली और त्योहारों से जुड़ी रहे, इसके लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

हरेली की हरियाली और भोजली की आत्मीयता ने पूरे आयोजन को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया। पारंपरिक परिवेश में मनाए गए इस पर्व ने प्रेम, अपनापन, मितान और भाईचारे का संदेश देते हुए यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान उसकी समृद्ध लोकसंस्कृति और दिलों को जोड़ने वाली परंपराओं में बसती है।

भोजली पर्व के माध्यम से यही संदेश दिया गया—“माटी से जुड़ें, संस्कृति को संजोएं और रिश्तों में अपनापन बनाए रखें।”

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