छह माह में 400 गोवंशों का बना आशियाना, विश्व गीता धेनु गोविंद पक्षी सेवा धाम को मिला राज्य सम्मान

कुम्हारी। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 3 नवंबर को आयोजित राज्य अलंकरण समारोह में ग्राम परसदा स्थित ‘विश्व गीता धेनु गोविंद पक्षी सेवा धाम’ को प्रतिष्ठित ‘यतियतन लाल सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। पशु-पक्षियों के संरक्षण एवं सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले इस सेवा धाम ने महज छह महीने में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यहां वर्तमान में करीब 400 घायल एवं बेसहारा गोवंशों को आश्रय दिया गया है, वहीं पक्षियों के संरक्षण के लिए भी व्यापक व्यवस्था की गई है।
राजधानी रायपुर से लगे कुम्हारी के समीप परसदा स्थित इस सेवा धाम की स्थापना समाजसेवी गोपाल प्रसाद सुल्तानिया ने अपने माता-पिता स्वर्गीय विश्वनाथ सुल्तानिया एवं स्वर्गीय गीता देवी सुल्तानिया की पावन स्मृति में की है। सेवा धाम का उद्देश्य घायल एवं बेसहारा पशु-पक्षियों को सुरक्षित आश्रय, समुचित उपचार और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है।


60 फीट ऊंचा विशाल पक्षी घर बना आकर्षण
सेवा धाम परिसर में पक्षियों के संरक्षण के लिए 60 फीट ऊंचा विशाल पक्षी घर बनाया गया है। इसमें 768 विशेष घोंसले तैयार किए गए हैं, जहां करीब दो हजार पक्षियों के सुरक्षित निवास, दाना-पानी और वास की व्यवस्था की गई है। परिसर में गोवंशों के साथ-साथ पक्षियों की देखभाल को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है।
24 घंटे चिकित्सा और गोवंशों की देखभाल
सेवा धाम में करीब 400 घायल एवं बीमार गोवंशों को आश्रय दिया गया है। इनके उपचार के लिए चार बड़े हॉल बनाए गए हैं। मवेशियों को घर जैसा प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से परिसर में सैकड़ों पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा अत्याधुनिक मेडिकल सेंटर, आइसोलेशन वार्ड, उपचार कक्ष, चारा गोदाम एवं सब्जी घर की सुव्यवस्थित सुविधा विकसित की गई है।
प्रकृति और ग्रामीण जीवन के संरक्षण का संकल्प
सेवा धाम के संचालक गोपाल प्रसाद सुल्तानिया ने प्रकृति, ग्रामीण जीवन और जीव-जंतुओं के संरक्षण को अपना प्रमुख उद्देश्य बनाया है। उनका मानना है कि गोवंश केवल दूध देने वाले पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसी सोच के साथ सेवा धाम में घायल एवं असहाय पशु-पक्षियों को नया जीवन देने का प्रयास किया जा रहा है।
सेवा धाम में मवेशियों की मृत्यु होने पर कुम्हारी नगर पालिका के सहयोग से विधि-विधानपूर्वक अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी की गई है। परिसर में प्रवेश द्वार पर गोविंद मंदिर स्थापित है, वहीं हरित वातावरण को विकसित कर पशु-पक्षियों के अनुकूल प्राकृतिक परिवेश तैयार किया गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मिला यह सम्मान सेवा धाम के प्रयासों को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। पशु-पक्षियों के संरक्षण और सेवा के क्षेत्र में यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।



