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बीज घोटाला उजागर: अमानक बीज किसानों को बांटे गए/ढालेश साहू

दुर्ग: छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम मर्यादित, दुर्ग द्वारा रबी एवं खरीफ सीजन में किसानों को अमानक बीज वितरित किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस प्रकरण में जनपद सदस्य संघ अध्यक्ष व किसान नेता ढालेश साहू ने जिला कलेक्टर दुर्ग एवं पुलिस अधीक्षक दुर्ग को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं बीज डीलरों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में बताया गया है कि रबी सीजन के दौरान ग्राम नगपुरा क्षेत्र के किसानों को गेहूं किस्म HI-8759 का बीज वितरित किया गया, जिसमें अपेक्षित अंकुरण नहीं हुआ। खराब अंकुरण के कारण किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी और अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यह स्थिति बीज अधिनियम 1966 की धारा 6 के अंतर्गत निर्धारित गुणवत्ता एवं अंकुरण मानकों का उल्लंघन है।

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इसी प्रकार खरीफ सीजन में बीज निगम के खोपली उपकेंद्र के माध्यम से ग्राम खोपली के किसानों को MTU-1318 धान किस्म का बीज वितरित किया गया। किसानों की शिकायतों के बाद कृषि विभाग द्वारा कराए गए प्रयोगशाला परीक्षण में 09 जुलाई 2025 को जारी बीज नमूना विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार धान बीज का अंकुरण अमानक 72 प्रतिशत एवं 69 प्रतिशत पाया गया, जबकि बीज नियम 1968 के अनुसार धान बीज के लिए न्यूनतम अंकुरण मानक इससे अधिक निर्धारित है।

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सरकारी प्रयोगशाला रिपोर्ट से बीज के अमानक होने की पुष्टि होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से किसानों में भारी आक्रोश है। बीज अधिनियम 1966 की धारा 7 अमानक बीज के विक्रय एवं वितरण पर प्रतिबंध लगाती है, वहीं धारा 19 के अंतर्गत यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके साथ ही बीज नियंत्रण आदेश 1983 बीज वितरकों एवं संबंधित अधिकारियों पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने का वैधानिक दायित्व तय करता है।

इस मामले में किसान प्रतिनिधि ढालेश साहू ने कहा—

“सरकारी प्रयोगशाला रिपोर्ट में 72 प्रतिशत और 69 प्रतिशत अंकुरण अमानक साबित होने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती है, तो यह सीधा किसानों के साथ अन्याय है। दो कृषि सत्रों में अमानक बीज बांटकर किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ा गया है। अब मामला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के समक्ष है। यदि दोषी अधिकारियों और बीज डीलरों पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो किसान विवश होकर लोकतांत्रिक और कानूनी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।”

ढालेश साहू ने बताया कि इस संबंध में 28 जनवरी 2026 को बीज निगम के बीज प्रबंधक को आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन संतोषजनक कार्रवाई न होने के कारण अब प्रशासन और पुलिस स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की गई है। किसानों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर अमानक बीज वितरण के लिए जिम्मेदार सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रभावित किसानों को उचित क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।

नियमों का दिया हवाला

इस पूरे प्रकरण में निम्न वैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन सामने आया है—

बीज अधिनियम 1966 की धारा 6 —* अधिसूचित बीज का निर्धारित गुणवत्ता एवं अंकुरण मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य।

बीज अधिनियम 1966 की धारा 7 — अमानक बीज का विक्रय एवं वितरण प्रतिबंधित।

बीज अधिनियम 1966 की धारा 19 — अधिनियम के उल्लंघन पर दंडनीय अपराध एवं एफआईआर का प्रावधान।

बीज नियम 1968 — धान एवं अन्य फसलों के लिए न्यूनतम अंकुरण मानक निर्धारित।

बीज नियंत्रण आदेश 1983 —बीज वितरकों एवं संबंधित अधिकारियों पर गुणवत्ता नियंत्रण एवं जवाबदेही का वैधानिक दायित्व।

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