अमलेश्वरकुम्हारीखेती किसानी के गोठचरौदाछत्तीसगढ़जामगांव आरदुर्ग भिलाईदेश दुनियाधमतरीपाटनबालोदबिलासपुरभिलाई 3राजनांदगांवरानीतराईरायपुरसेलूद

चारों लेबर कोड श्रमिक हितों पर हमला — राकेश ठाकुर, देशव्यापी हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन

दुर्ग। संयुक्त ट्रेड यूनियन भिलाई—इंटक, एटक, एचएमएस, एक्टू, सीटू, लोईम एवं स्टील वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर चारों लेबर कोड को रद्द किए जाने की मांग को लेकर आज देशव्यापी भारत बंद एवं हड़ताल का आयोजन किया गया। भिलाई के मुर्गा चौक में आयोजित धरना-प्रदर्शन में जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) ने भाग लेकर श्रमिकों के आंदोलन को समर्थन दिया।

जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चारों श्रम संहिताएं— वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता श्रमिक हितों पर हमला है। देश के करोड़ों श्रमिकों के अधिकारों को सीमित करने वाली हैं, जिनका संयुक्त ट्रेड यूनियन द्वारा विरोध पूर्णतः न्यायसंगत है।

वेतन संहिता-

उक्त संहिता के संदर्भ में ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इस संहिता के माध्यम से न्यूनतम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया को केंद्रीकृत कर दिया गया है, जिससे राज्यों के अधिकार कमजोर होते हैं। साथ ही “फ्लोर वेज” की व्यवस्था से कई राज्यों में वास्तविक न्यूनतम वेतन कम होने की आशंका है।

औद्योगिक संबंध संहिता-

यह संहिता सबसे अधिक विवादित है। इसके तहत 300 तक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी और तालाबंदी की छूट दी गई है (पहले यह सीमा 100 थी)। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इससे नौकरी की सुरक्षा समाप्त हो जाएगी और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हड़ताल करने के लिए कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं, जिससे श्रमिकों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होते हैं।

सामाजिक सुरक्षा संहिता-

सरकार का दावा है कि इससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ मिलेगा, लेकिन यूनियनों का कहना है कि इसमें ठोस और अनिवार्य प्रावधानों का अभाव है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने की स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई है, जिससे श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिलने पर प्रश्नचिह्न है।

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता –

इस संहिता में कई छोटे और मध्यम उद्योगों को सुरक्षा मानकों से छूट दिए जाने का प्रावधान है। ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों में गिरावट आएगी और श्रमिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

चारो लेबर कोड के संबंध में कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि ये चारों लेबर कोड मिलकर श्रमिकों की दशकों की संघर्ष से प्राप्त उपलब्धियों को कमजोर करते हैं। देश की अर्थव्यवस्था मजदूरों के परिश्रम पर टिकी है, और यदि उनके अधिकारों का हनन होगा तो सामाजिक असंतोष बढ़ेगा। हम केंद्र सरकार से मांग करते है कि चारों लेबर कोड को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा सभी ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा कर सर्वसम्मति से श्रम कानून बनाए जाएं। कांग्रेस पार्टी श्रमिकों की न्यायोचित मांगों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु निरंतर संघर्ष करती रहेगी।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!