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श्रीकृष्ण के गीता उपदेश जीवन की सार्थकता के लिए जरूरी…विष्णु अरोड़ा

रानीतराई। केसरा में श्रीमद् भागवत महापुराण के अंतिम दिवस अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक परम पूज्य बाल योगी श्री विष्णु अरोड़ा जी के मुखाग्रह से भागवत महापुराण गीता पाठ,हवन एवं पूर्णाहुति से संपन्न हुआ।

बालयोगी श्री अरोड़ा जी ने गीता जीवन का सार बतलाते हुए हमें सभी का सम्मान के साथ अधर्म का विरोध भी करना चाहिए।

“जीवन में माताओं का स्थान सर्वोच्च होता है,मां ही संस्कारों की प्रथम गुरु होती है।जिस परिवार में मातृशक्ति का सम्मान होता है,सदैव सुख,शांति और समृद्धि का वास होता है।” उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को पुनः अपने संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों की ओर लौटने की आवश्यकता है। इसमें माताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कथाचार्य ने श्रीमद् भागवत के माध्यम से बताया कि भक्ति,सेवा और संस्कार ही जीवन को सफल बनाते हैं। उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि वे जीवन में धर्म, सत्य और सदाचार को अपनाएं तथा माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करें।

व्यास पीठ का आशीर्वाद लेने पूर्व मुख्यमंत्री के सुपुत्र चैतन्य बघेल,पूर्व ओएसडी आशीष वर्मा,पूर्व जिला उपाध्यक्ष अशोक साहू,जनपद सदस्य दिनेश साहू,ब्लॉक अध्यक्ष राजेश ठाकुर,मंडल अध्यक्ष सोहन जोशी,सरपंच डॉ.ईश्वर निषाद,तेजराम सिन्हा,गजानंद सिन्हा,संतु सिन्हा,डॉ पवन निर्मलकर,नरेश सिन्हा,हरिनाथ सिन्हा,कमलेश पटेल,लक्की सिन्हा,इंद्रेश्वर सिन्हा,सागर सिन्हा,चंद्रशेखर सिन्हा,राजू सिन्हा,खेमलाल सिन्हा,एम एल सेन,नारद सेन,राजाराम सिन्हा,संतोष सिन्हा,मदन यादव,पुनारद सिन्हा,अशोक पटेल सहित भागवत प्रेमी एवं समस्त ग्रामवासी केसरा उपस्थित थे।

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