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ग्राम पंचायत आगेसरा की 5 एकड़ सरकारी भूमि पर विवाद गहराया, हाईकोर्ट पहुंचा मामला; ग्रामीणों में भारी आक्रोश

पाटन। दुर्ग जिले के दक्षिण पाटन क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत आगेसरा में सरकारी भूमि एवं अतिक्रमण को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों पूर्व जीविकोपार्जन के उद्देश्य से गांव में आए बाहरी कुम्हार पाड़ा समुदाय के कुछ लोगों ने धीरे-धीरे सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया और अब उसी भूमि के आवंटन की मांग करते हुए माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर का दरवाजा खटखटाया है।

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित परिवारों ने प्रारंभ में किसानों की भूमि पर ईंट-भट्टा संचालित करते हुए निवास शुरू किया था, लेकिन बाद में सरकारी भूमि पर भी कब्जा कर लिया। गांववासियों का कहना है कि पिछले लगभग दस वर्षों से वे इस अतिक्रमण का विरोध करते आ रहे हैं। विवादित भूमि में मां वृंदा देवी डिंडा कपाट धाम परिसर का पार्किंग क्षेत्र भी शामिल बताया जा रहा है, जहां कथित रूप से कब्जा किया गया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम सभा में पार्किंग स्थल एवं अन्य सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके आधार पर ग्राम पंचायत द्वारा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की पंचायती राज अधिनियम धारा 56 के तहत नोटिस जारी किया गया। इसके विरुद्ध संबंधित पक्ष द्वारा कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, सरपंच, सचिव एवं दो अन्य ग्रामीणों को पक्षकार बनाते हुए उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की गई है।

ग्राम पंचायत आगेसरा के सरपंच ने बताया कि पंचायत ग्रामीणों की मांग एवं ग्राम सभा के प्रस्ताव के अनुरूप सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जानकारी पूरे गांव को दी गई है, जिसके बाद ग्रामीणों में व्यापक नाराजगी एवं चिंता का माहौल है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किए जाने से गांव के मूल निवासियों को आबादी भूमि तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ईंट-भट्टा आबादी क्षेत्र के निकट संचालित होने से पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही रेत उत्खनन एवं किसानों की भूमि से जुड़े अन्य विवादों की शिकायतें भी सामने आई हैं।

एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि उसने जीविकोपार्जन के उद्देश्य से अपनी निजी भूमि उपयोग के लिए दी थी, लेकिन अब उसे अपने ही खेत तक आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें विभिन्न प्रकार की धमकियां भी दी जा रही हैं।

वर्तमान में सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधि गांव की सरकारी भूमि के संरक्षण के लिए न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। वहीं समस्त ग्रामीणों को माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर से निष्पक्ष न्याय एवं सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की उम्मीद है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:

– सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

– धार्मिक स्थल एवं पार्किंग क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाए।

– ग्राम सभा के प्रस्तावों का सम्मान करते हुए कार्रवाई की जाए।

– गांव के मूल निवासियों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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