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पालिका की सामान्य सभा में पत्रकारों पर रोक: क्या छुपाना चाहती है अमलेश्वर पालिका?

अमलेश्वर 10 सितंबर / नगर पालिका परिषद अमलेश्वर की सामान्य सभा की बैठक में पत्रकारों का प्रवेश वर्जित करना गंभीर सवाल खड़े करता है। लोकतंत्र की चौथी ताकत को दरकिनार करने की यह कोशिश पारदर्शिता पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा रही है। आखिर ऐसी कौन-सी बातें हैं जिन्हें पालिका प्रशासन जनता और मीडिया से छुपाना चाहता है?

—पिछली बैठक में 11 एजेंडे – जानकारी क्यों दबाई गई?

पिछली सामान्य सभा की बैठक में 11 अहम एजेंडों पर चर्चा हुई थी और अधिकांश पर सहमति भी बनी थी। लेकिन उन निर्णयों की जानकारी न तो आम जनता तक पहुंचाई गई और न ही पत्रकारों को दी गई। इससे साफ झलकता है कि पालिका प्रशासन योजनाओं की पारदर्शिता से बचना चाहता है।

—विपक्ष का हमला – मूलभूत सुविधाएं ठप

विपक्षी पार्षदों ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि पालिका मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल रही है।

अवैध प्लाटिंग

अवैध कब्जा

अवैध निर्माण

इन सब पर रोक लगाने की मांग लगातार की गई, लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है।

—पालिका अध्यक्ष के दावे और हकीकत

पालिका अध्यक्ष दयानंद सोनकर का दावा है कि नगर के विकास को लेकर सभी पार्षद सहमत हैं। मगर सच्चाई यह है कि नागरिक अब भी पानी, रोशनी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं।

–100 करोड़ का बजट – जनता तक कब पहुंचेगा लाभ?

नगर पालिका परिषद ने 100 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जिसमें जल कार्य, प्रकाश व्यवस्था और शव एम्बुलेंस जैसी योजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। लेकिन जनता का सवाल है – जब तक जमीनी स्तर पर इनका असर नहीं दिखता, तब तक यह बजट केवल कागजों पर ही रहेगा।

–जनता का गुस्सा – “हमें सिर्फ वादे मिले”

नगरवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बार विकास के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन को अपने कामकाज पर भरोसा है तो पत्रकारों को रोकने की नौबत क्यों आई?

—पत्रकारों पर रोक से बढ़ा अविश्वास

सभा में पत्रकारों का प्रवेश वर्जित करना इस बात का संकेत है कि पालिका प्रशासन जवाबदेही से बचना चाहता है। विपक्ष और आम जनता का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया को रोकना पारदर्शिता पर हमला है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अमलेश्वर पालिका वास्तव में नगर के विकास को लेकर गंभीर है, या फिर यह सब केवल बजट और घोषणाओं तक सीमित रह जाएगा?

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