छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस एवं रजत जयंती वर्ष पर प्रदेश की दिशा और दशा पर चिंता व्यक्त — ढालेश साहू
दुर्ग : छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर जनपद सदस्य एवं किसान नेता श्री ढालेश साहू ने प्रदेश की वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर हम अपने राज्य की 25 वर्ष की गौरवशाली यात्रा का उत्सव मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के किसान, मजदूर और आम नागरिक आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं।
*किसानों और मजदूरों की स्थिति पर चिंता*
छत्तीसगढ़, जिसे ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, उसी प्रदेश के मेहनतकश किसान आज अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के साथ-साथ अपनी जमीन को विभिन्न परियोजनाओं और विकास के नाम पर हो रहे अधिग्रहण से बचाने के लिए आंदोलन करने को विवश हैं।
मजदूर वर्ग को भी न्यूनतम दैनिक वेतन की गारंटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि यह परिस्थिति प्रदेश के श्रम एवं कृषि आधारित समाज की गरिमा और सम्मान पर सीधा प्रश्नचिह्न है!
*संस्कृति और अस्मिता पर खतरा*
केवल आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, कला, परंपरा और छत्तीसगढ़ियों की आस्था व देवी देवताओं पर भी गलत टिप्पणी कर लगातार आघात पहुंचाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, बोली, नाचा-गान, पंथी और पारंपरिक जीवन मूल्यों पर बाहरी प्रभाव और असंवेदनशीलता का असर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
यह हमारी पहचान और अस्मिता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
*आदिवासी समाज के अधिकारों पर संकट*
आज छत्तीसगढ़ का मूल आदिवासी समाज भी अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्षरत है।
उनके परंपरागत अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है, और वे अपने अस्तित्व तथा पहचान की रक्षा के लिए मर-मिटने को भी तैयार हैं।
उन्होंने इसे प्रदेश की सामाजिक न्याय व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रश्न बताया।
*रोजगार व शासन व्यवस्था पर भी सवाल*
राज्य में संचालित विभिन्न विभागों पर हजारों पद सालों से खाली पड़े हैं, न ही भर्ती प्रक्रिया अपनाई जा रही है और न ही रोजगार के अवसर प्रदान किये जा रहे हैं जिससे युवाओं में असंतोष व्याप्त है।
*रजत जयंती: आत्ममंथन का अवसर*
रजत जयंती वर्ष केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और पुनःसंकल्प का अवसर है।
“हमें यह समझना होगा कि प्रदेश की सच्ची प्रगति तभी संभव है जब हमारे किसान, मजदूर, युवा, आदिवासी और आम नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें — और हमारी संस्कृति तथा परंपरा सुरक्षित रहे।”
*जनता से आह्वान*
प्रदेश की जनता से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट हों तथा छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा और सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत रहें।
*जय जोहार! जय छत्तीसगढ़ महतारी!*



