राज्य विद्युत नियामक आयोग पहुंचे- ढालेश साहू ,बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय जनसुनवाई में किसान नेता ढालेश साहू ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने 132 केवी एवं उससे अधिक क्षमता की विद्युत लाइनों के निर्माण में पारदर्शिता की कमी, मुआवजे के भुगतान में देरी और सरकारी प्रक्रियाओं के उल्लंघन का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि किसानों के कानूनी अधिकारों को ताक पर रखकर परियोजनाओं को जबरन आगे बढ़ाया जा रहा है।



नियमों की अनदेखी का आरोप
ढालेश साहू ने सुनवाई में स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग द्वारा 28 अगस्त 2025 को जारी आदेश के अनुसार, विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 164 और भारतीय टेलीग्राम अधिनियम, 1885 के तहत खंभा या टावर स्थापना की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई है। इसमें साफ उल्लेख है कि निर्धारित मुआवजे का भुगतान करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है। इसके बावजूद, कई स्थानों पर किसानों को क्षतिपूर्ति दिए बिना ही टावर के आधार (बेस) बना दिए गए हैं, जो शासन के आदेशों की खुली अवहेलना है।
प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 10 मार्च 2025 के आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रभावित किसान की उपस्थिति में ही भूमि का ‘संयुक्त माप-जोख’ किया जाना अनिवार्य है, लेकिन धरातल पर अधिकारी अपनी मनमर्जी कर रहे हैं।
भुगतान के लिए सुझाई गई सरल व्यवस्था
मुआवजा प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु सुझाव दिया कि:
जिस तरह फसल की क्षतिपूर्ति ऊर्जा विभाग सीधे किसानों को देता है, ठीक उसी तरह भूमि का मुआवजा भी राजस्व विभाग द्वारा गणना के बाद ऊर्जा विभाग के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भेजा जाना चाहिए। इससे किसानों को तहसील, एसडीएम या कलेक्टर कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
“पहले मुआवजा – फिर निर्माण”
साहू ने आयोग के समक्ष अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि “पहले मुआवजा – फिर निर्माण” के सिद्धांत का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता, तो इसे किसानों के संवैधानिक अधिकारों का हनन माना जाएगा। उन्होंने आयोग से मांग की कि पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान के लिए तत्काल कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
इस जनसुनवाई में किसान प्रतिनिधियों के रूप में राजकुमार गुप्ता जी, बद्री पारकर जी, उत्तम चंद्राकर जी, बाबूलाल साहू जी और परमानंद यादव जी, ढालेश साहू भी उपस्थित रहे।



