दुर्ग जिले में 97 करोड़ के ‘नल-जल’ प्रोजेक्ट अधर में, ढालेश साहू ने आंदोलन की दी चेतावनी
दुर्ग। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ दुर्ग जिले में अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिले की तीन प्रमुख समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए लगभग ₹97.18 करोड़ की स्वीकृत राशि के बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक नल-जल आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। गर्मी की दस्तक के साथ ही ग्रामीणों में पानी की समस्या को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
योजनाओं का विवरण और लागत:
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा जिले की तीन बड़ी योजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है:
-जेवरा सिरसा खुर्द–भटगांव समूह योजना: लागत लगभग ₹25.80 करोड़।
-निकुम समूह योजना: लागत लगभग ₹26.29 करोड़।
-चंदखुरी–कोलिहापुरी–पिसेगांव समूह योजना: लागत लगभग ₹45.07 करोड़।
इन तीनों महत्वपूर्ण योजनाओं की कुल लागत लगभग ₹97.18 करोड़ है।
ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह:
बताया जाता है कि जेवरा सिरसा खुर्द–भटगांव योजना का कार्य मेसर्स उमंग इंफ्रास्ट्रक्चर को 29 सितंबर 2023 को दिया गया था। इसी प्रकार निकुम योजना का कार्य मे. आर्यन कंस्ट्रक्शन, बिलासपुर को और चंदखुरी–पिसेगांव योजना का कार्य मेसर्स भवानी बोरवेल्स, जांजगीर-चांपा को 6 अक्टूबर 2023 को सौंपा गया था। कार्य आदेश जारी होने के तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई गांवों में नल कनेक्शन शुरू नहीं हो पाए हैं।
जनपद सदस्य ने घेरा विभाग को:
इस विषय को लेकर आयोजित बैठक में जनपद सदस्य ढालेश साहू ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा, “जब संबंधित ठेकेदारों को वर्ष 2023 में ही कार्य आदेश जारी कर दिए गए थे, तो वर्ष 2026 शुरू होने तक भी ग्रामीणों को पानी क्यों नहीं मिल पा रहा है? जनता के करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बाद भी यदि लाभ नहीं मिल रहा, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
महिलाओं का आक्रोश:
बैठक में उपस्थित ग्रामीण महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने के नाम पर गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया है, जिससे आवागमन में परेशानी हो रही है और घरों तक पानी नहीं पहुँचा है।
आंदोलन की चेतावनी:
जनपद सदस्य ढालेश साहू ने प्रशासन से इन योजनाओं की विस्तृत समीक्षा कराने और कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर इन तीनों योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर कार्यों को गति नहीं दी गई, तो वे हितग्राही महिलाओं और ग्रामीणों के साथ मिलकर जिला मुख्यालय का उग्र घेराव और आंदोलन करेंगे।







