महाविद्यालय में “भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न आयाम” विषय पर तीन दिवसीय व्याख्यान माला कार्यक्रम सम्पन्न”

रानीतराई। स्व. दाऊ रामचंद्र साहू शासकीय महाविद्यालय, रानीतराई में “भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न आयाम”विषय पर तीन दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया। IQAC प्रभारी एवं कार्यक्रम के संयोजक श्री चंदन गोस्वामी तथा IKS प्रभारी एवं सहसंयोजक श्रीमती अंबिका ठाकुर बर्मन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित एवं RUSA 2.0 द्वारा प्रायोजित यह व्याख्यान माला दिनांक 17/03/2026 से 19/03/2026 तक आयोजित की गई।


प्रथम दिवस के मुख्य वक्ता डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह, पूर्व कुलपति, शहीद महेन्द्र सिंह कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर रहे। द्वितीय दिवस के मुख्य वक्ता डॉ. महेश चन्द्र शर्मा, पूर्व प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय उतई (दुर्ग), वैशाली नगर (दुर्ग) एवं रामाटोला (राजनांदगांव) रहे। तृतीय दिवस के मुख्य वक्ता डॉ. मैथलीशरण गुप्ता, संयुक्त संचालक, राज्य परियोजना कार्यालय, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, रायपुर से उपस्थित रहे।
प्रथम दिवस में कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती माता के छायाचित्र पर पुष्पार्पण, सरस्वती वंदना एवं राजकीय गीत के साथ हुआ। प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने “आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली हजारों वर्षों में विकसित एक समृद्ध बौद्धिक परम्परा है, जिसमें वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, दर्शन, गणित, खगोल, कला एवं नैतिक शिक्षा सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक शिक्षा प्रायः केवल बौद्धिक विकास तक सीमित रहती है, जबकि भारतीय ज्ञान प्रणाली शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक सभी पक्षों के विकास पर बल देती है। योग एवं ध्यान से मानसिक संतुलन एवं एकाग्रता में वृद्धि होती है। उन्होंने नैतिक मूल्यों जैसे सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा एवं कर्तव्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा पर्यावरण संरक्षण में भारतीय परम्परा की भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेश्मी वाशनीकर द्वारा तथा आभार प्रदर्शन सुश्री रेणुका वर्मा द्वारा किया गया।
द्वितीय दिवस में प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. महेश चन्द्र शर्मा ने “भारतीय ज्ञान परम्परा एवं वैदिक संस्कृति” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि यह परम्परा ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित एक अमूल्य धरोहर है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति की जड़ें वैदिक काल में निहित हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद हमारे प्राचीनतम ग्रंथ हैं। वैदिक संस्कृति में सूर्य, अग्नि एवं वायु जैसे तत्वों को देवतुल्य मानकर सम्मान दिया जाता है तथा सत्य, अहिंसा और नैतिक जीवन पर विशेष बल दिया जाता है। उन्होंने गीता, रामायण एवं महाभारत के माध्यम से जीवन मूल्यों को भी स्पष्ट किया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती आराधना देवांगन तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती अंबिका ठाकुर बर्मन द्वारा किया गया।
तृतीय दिवस में मुख्य वक्ता डॉ. मैथलीशरण गुप्ता उपस्थित रहे। प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण में कहा कि “जिसके पास ज्ञान है, उसके पास मान है; जिसके पास मान है, वह महान है।”
मुख्य वक्ता डॉ. गुप्ता ने “छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर व्याख्यान देते हुए RUSA योजना (2013) एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति (5+3+3+4 संरचना) पर आधारित है तथा इसमें मातृभाषा में शिक्षा, लचीलापन एवं बहुविषयक अध्ययन पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के अंतर्गत वेद, नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालय एवं विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परम्पराएँ महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शगुफ्ता सिद्दीकी तथा आभार प्रदर्शन सुश्री भारती गायकवाड़ द्वारा किया गया।
तृतीय सत्र में कार्यक्रम का समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण विशिष्ट अतिथि श्री निर्मल जैन (अध्यक्ष, जनभागीदारी समिति) एवं श्री धनराज साहू (सदस्य) द्वारा किया गया। श्री निर्मल जैन ने भारतीय ज्ञान परम्परा के प्राचीन से आधुनिक स्वरूप पर जानकारी प्रदान की।कार्यक्रम में डॉ. शिखा अग्रवाल, प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय जामगांव (आर), सहित अन्य सहायक प्राध्यापक उपस्थित रहे। महाविद्यालय के समस्त सहायक प्राध्यापकों में डॉ. रेशमी वासनीकर ,सुश्री भारती गायकवाड़, डॉ.शगुफ्ता सिद्दीकी, श्रीमती अंबिका ठाकुर बर्मन, श्रीमती आराधना देवांगन,सुश्री रेणुका वर्मा तथा अतिथि व्याख्याताओं में श्री टीकेश्वर कुमार पाटिल, सुश्री शिखा मडरिया, श्री वेणु कुमार, डॉ. देबीलाल उपस्थित रहे। कार्यालयीन कर्मचारियों में श्री नरेश मेश्राम, श्रीमती महेश्वरी निषाद, सीमा सहित महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।








