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इंदिरा गांव गंगा योजना में भारी लापरवाही, करोड़ों की लागत से बना ढांचा जर्जर—ग्रामीणों में आक्रोश

भूषण देशलहरे, पाटन। इंदिरा गांव गंगा योजना में ठेकेदार की घोर लापरवाही अब खुलकर सामने आने लगी है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई यह महत्वाकांक्षी योजना आज बदहाली की कगार पर पहुंच गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना से गांवों को राहत और विकास की उम्मीद थी, वही अब खतरे का कारण बनती जा रही है।

गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में बड़े उद्देश्य के साथ की गई थी। इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में पानी और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर यह खर्च व्यर्थ साबित होता नजर आ रहा है।

पाटन से खम्हरिया जाने वाले मार्ग पर नाले के ऊपर बनाए गए ढांचे की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। पिलरों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं और संरचना इतनी कमजोर हो गई है कि कभी भी गिर सकती है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी और ठेकेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। पंचायत स्तर पर भी उदासीनता साफ झलक रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां एक चौकीदार तैनात है, लेकिन उसकी भूमिका केवल औपचारिकता तक सीमित है। अधिकारी कभी-कभार निरीक्षण के लिए आते हैं, लेकिन बिना किसी ठोस कार्रवाई के लौट जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते करोड़ों की योजना बर्बादी की ओर बढ़ रही है।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जिस योजना से उनके जीवन में सुधार आना था, वही अब उनके लिए खतरा बन गई है। लोगों को हर समय किसी बड़े हादसे का डर सताता रहता है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

वर्षण:

यह योजना सिंचाई एवं गांव के तालाबों में पानी की सुविधा के लिए बनाई गई थी, लेकिन आज भी अधूरी पड़ी है। गांव में केवल एक चपरासी तैनात है और ठेकेदार की लापरवाही के कारण योजना की हालत दयनीय हो चुकी है। योजना का सही क्रियान्वयन नहीं होने से ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

मांग:खम्हरिया के सरपंच डोमेंद्र

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और योजना को दुरुस्त करने की मांग की है।

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