मनरेगा से निर्मित तालाब की मिट्टी उखाड़े जाने का मामला, वृक्षारोपण भी हुआ प्रभावित, विभाग है मौन

अम्लेश्वर, पाटन। जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत कोपेडीह कापसी में मनरेगा योजना के तहत निर्मित तालाब की मिट्टी उखाड़े जाने तथा तालाब किनारे किए गए वृक्षारोपण के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर जांच की मांग उठने लगी है।
जानकारी के अनुसार मनरेगा से बने तालाब के किनारों की मिट्टी हटाए जाने से तालाब की संरचना प्रभावित हुई है। वहीं तालाब के आसपास लगाए गए पौधे उखड़ गए हैं तथा उनकी सुरक्षा के लिए लगाए गए ट्री-गार्ड भी क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से निर्मित इस तालाब के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।



सूत्रों के अनुसार तालाब से निकाली गई मिट्टी का परिवहन किया गया। यदि मिट्टी का उपयोग अन्यत्र किया गया है तो यह जांच का विषय है कि इसके लिए संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर तालाब किनारे की मिट्टी हटाई गई, जबकि मौके पर सड़क निर्माण का कोई स्पष्ट कार्य दिखाई नहीं देता। यदि वास्तव में सड़क निर्माण स्वीकृत था तो संबंधित कार्यों और स्वीकृतियों की भी जांच आवश्यक बताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान संचालित किया जा रहा है। ऐसे समय में तालाब परिसर में लगाए गए पौधों का नुकसान होना तथा ट्री-गार्ड का क्षतिग्रस्त होना पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर पौधे नष्ट हुए हैं, वहां पुनः पौधारोपण कराया जाना चाहिए।
वर्तमान में तालाब में पानी भरा हुआ है और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से यहां दोबारा पौधारोपण कर हरियाली विकसित की जा सकती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा तालाब एवं वृक्षारोपण को पुनर्स्थापित करने की मांग की है।
नोट: इस समाचार का उद्देश्य किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि या संस्था की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दे को सामने लाना है।



