तूफान से फसल बर्बाद और पटवारी हड़ताल पर, भगवान भरोसे छत्तीसगढ़ का किसान: राकेश ठाकुर

दुर्ग। हाल ही में आए अर्नब तूफान और बेमौसम बारिश ने छत्तीसगढ़ के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। पककर तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में पूरी तरह बिछ गई है और पानी में डूबने के कारण सड़ने की कगार पर है। इस भीषण संकट के बीच आज कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने ग्राम भोथली, मगरघटा सहित विभिन्न ग्रामो के किसानों के साथ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने खेतों में जाकर नुकसान की जमीनी हकीकत देखी और पीड़ित किसानों से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया।
खेतों के मुआयने के दौरान फसलों की बर्बादी देखकर जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर बेहद भावुक और आक्रोशित नजर आए।
जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा की “यह नुकसान सिर्फ फसल का नहीं है, बल्कि हमारे अन्नदाता के सालभर के खून-पसीने, उनकी उम्मीदों और बच्चों के भविष्य की बर्बादी है। दीवाली के त्योहार और धान खरीदी की शुरुआत से ठीक पहले आई इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों के निवाले को छीन लिया है। आज किसान अपने ही खेतों में आंसुओं के सैलाब में डूबा हुआ है, लेकिन संवेदनशील होने का दावा करने वाली राज्य सरकार पूरी तरह कुंभकर्णी नींद सो रही है।”
दौरे के दौरान जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने राज्य में चल रही पटवारियों की हड़ताल पर गहरी चिंता व्यक्त की और प्रशासन की सुस्ती पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “एक तरफ कुदरत की मार से किसान बेहाल है, तो दूसरी तरफ पटवारियों की हड़ताल के कारण प्रशासन पूरी तरह पंगु हो चुका है। जब खेतों का मुआयना करने और प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करने वाला जमीनी अमला (पटवारी) ही आंदोलन पर बैठा है, तो सरकार किस मुंह से त्वरित सर्वे और राहत का दावा कर रही है? आपदा के कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक प्रभावित गांवों का रुख करने वाला कोई नहीं है। राज्य सरकार की हठधर्मिता और लचर नीति के कारण आज पूरा जिला भगवान भरोसे चल रहा है। सरकार को तुरंत पटवारियों से सम्मानजनक वार्ता कर हड़ताल समाप्त करानी चाहिए।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 3 दिनों के भीतर सर्वे (विशेष गिरदावरी) की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के हक के लिए उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होगी।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने राज्य सरकार से मांग किया कि जब तक पटवारियों की हड़ताल खत्म नहीं होती, तब तक जिला प्रशासन कृषि विस्तार अधिकारियों और अन्य तकनीकी अमले की वैकल्पिक ड्यूटी लगाकर सर्वे कार्य को युद्ध स्तर पर शुरू करवाए। पूरे जिले के प्रभावित गांवों में तत्काल प्रभाव से आरबीसी 6-4 के तहत फसलों के नुकसान का शत-प्रतिशत पारदर्शी और डिजिटल सर्वे कराया जाए। धान की फसल के पूर्ण नुकसान को देखते हुए किसानों को कम से कम 40 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से तत्काल अंतरिम राहत राशि बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए। बीमा कंपनियों को निर्देशित कर, प्रीमियम काटने वाली कंपनियों से बिना किसी तकनीकी पेंच के जल्द से जल्द दावों का निपटारा कराया जाए।
बारिश के कारण धान में नमी बढ़ गई है, इसलिए आगामी धान खरीदी में नमी के कड़े नियमों को शिथिल किया जाए ताकि किसानों की उपज रिजेक्ट न हो।
दौरे के अंत में राकेश ठाकुर ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता इस दुख की घड़ी में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। सड़क से लेकर सदन तक अन्नदाताओं की इस आवाज को बुलंद किया जाएगा और सरकार को मुआवजा देने के लिए मजबूर किया जाएगा।
इस दौरान किसान डालू राम निषाद, अहेंद्र चेलक, तारण साहू, तिजाऊ निषाद, रामजी ध्रुव, गजाधर निषाद सहित अन्य किसान मौजूद रहे।



