संकल्प लेके गढ़ब नवा छत्तीसगढ़, संस्कृति अउ प्रकृति के संग करब विकास
अमलेश्वर, पाटन। छत्तीसगढ़ के 27वां राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर म आप मन ल गाड़ा-गाड़ा बधाई अउ शुभकामना। आज के दिन आओ, हमन कुछ नवा सोचे बर, कुछ अलग करे बर अउ अइसन काम करे बर संकल्प लेवन, जेकर ले आवइया पीढ़ी मन घलो गरब महसूस करय।
हर साल हमन राज्य स्थापना दिवस मनाथन, दीया बारथन अउ एक-दूसर ल बधाई देथन। फेर का हमन कभू सोचे हवन कि ए दिन ल अपन प्रदेश, समाज, प्रकृति अउ मानवता बर नवा संकल्प ले के दिन घलो बना सकथन?
का हमन अइसन छत्तीसगढ़ गढ़ सकथन, जेकर पहचान सिरिफ खनिज संपदा, उद्योग, सड़क अउ भवन ले नइ, बल्कि साहित्य, कला, संस्कृति, प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता अउ मानवीय संवेदना ले घलो होवय?
मोर मानना हे कि ये पूरा संभव हे। जरूरत हे अपन चेतना जगाय के, अपन मेहनत ल सही दिशा म लगाय के अउ अपन जिम्मेदारी ल ईमानदारी ले निभाय के।
छत्तीसगढ़ के पहचान, हमर जिम्मेदारी
हमर छत्तीसगढ़ सिरिफ एक राज्य नइ, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, परंपरा अउ मानवीय मूल्य के जीयत-जागत धरोहर आय। इहां के माटी म अपनापन हे, लोकगीत म जिनगी के मिठास हे, लोकनृत्य म सामूहिक आनंद हे अउ जनजातीय परंपरा म प्रकृति बर गहिर सम्मान झलकथे।
हमर पहचान जल, जंगल अउ जमीन ले जुड़े हे। ये सिरिफ प्राकृतिक संसाधन नइ, बल्कि हमर जिनगी के आधार अउ आवइया पीढ़ी के धरोहर आय।
आवव, ए स्थापना दिवस म संकल्प लेवन कि पानी के हर बूंद के महत्व समझबो, पेड़-रुख के रक्षा करबो, जादा ले जादा पौधा लगाबो, नदी-नरवा अउ जलस्रोत ल साफ-सुथरा रखे म सहयोग करबो अउ जंगल-जैव विविधता के संरक्षण बर जागरूकता फैलाबो।
प्रकृति के रक्षा सिरिफ एक विभाग, संस्था या व्यक्ति के जिम्मेदारी नइ हे। ये हम सबके साझा दायित्व आय। जब हर आदमी अपन हिस्सा के छोटकुन प्रयास ईमानदारी ले करही, त ओकर नतीजा बहुत बड़े हो सकथे।
संस्कृति बचही, तभे हमर पहचान बचही
संगवारी हो, आज दुनिया तेजी ले बदलत हे। तकनीक आगू बढ़त हे, जिनगी के तरीका बदलत हे अउ नवा पीढ़ी नवा अवसर के दिशा म बढ़त हे। फेर आधुनिक बने बर का अपन जड़ ल भुलाय जरूरी हे? बिल्कुल नइ।
हमन अइसन छत्तीसगढ़ बनाय बर हे, जहां आधुनिक शिक्षा अउ तकनीक के संग हमर लोकभाषा, लोककला, साहित्य, लोकगीत, लोकनृत्य अउ पारंपरिक ज्ञान ल घलो सम्मान मिलय।
हमर साहित्यकार, कलाकार, शिक्षक, किसान, मजदूर, कारीगर अउ समाजसेवी प्रदेश के असली ताकत आयं। समाज बर बिना प्रचार अउ स्वार्थ के काम करे वाले मनखे मन के योगदान ल पहिचानना, सम्मान देना अउ दूसर मन ल प्रेरित करना घलो विकास के जरूरी हिस्सा आय।
आवव, अपन सांस्कृतिक विरासत ल सिरिफ तिहार अउ समारोह तक सीमित झन रखन। अपन व्यवहार अउ जिनगी म घलो अपनावन। लइका अउ युवा मन ल अपन माटी, लोकनायक अउ परंपरा ले जोड़न।
युवा मन के चेतना अउ मेहनत ले बनही नवा छत्तीसगढ़
किसी भी प्रदेश के भविष्य ओकर युवा मन के सोच, क्षमता अउ मेहनत ऊपर निर्भर करथे। हमर छत्तीसगढ़ के युवा मन म प्रतिभा के कमी नइ हे। जरूरत हे सही दिशा, अवसर अउ प्रोत्साहन देय के।
हमर युवा मन सिरिफ नौकरी खोजे वाले नइ, बल्कि रोजगार देय वाले घलो बनंय। स्टार्टअप, नवाचार अउ तकनीक के माध्यम ले नवा संभावना पैदा करंय। स्थानीय उत्पाद मन ल बाजार मिलय, गांव के प्रतिभा मन ल मंच मिलय अउ पारंपरिक कौशल आधुनिक तकनीक ले जुड़य।
फेर एक जरूरी सवाल हे—का विकास के लाभ समाज के आखिरी आदमी तक पहुंचत हे? का गांव के युवा, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी अउ कारीगर घलो विकास के यात्रा म बराबर के भागीदार बन पावत हें?
आदर्श राज्य के सपना तभे पूरा होही, जब विकास के अवसर समाज के हर वर्ग तक पहुंचही। अइसन माहौल बनाय के जरूरत हे, जहां युवा मन ल अपन प्रतिभा दिखाय के अवसर मिलय अउ ओकर सफलता के लाभ पूरा समाज ल मिलय।
व्यक्तिगत सफलता जब सामाजिक जिम्मेदारी ले जुड़थे, तभे वो समाज अउ राष्ट्र निर्माण के ताकत बनथे।
घर-घर दीया बारव, मन-मन म सेवा के संकल्प जगावव
ए राज्य स्थापना महोत्सव ल कुछ अलग अउ यादगार बनाय बर आओ, अपन घर म दीया बारव। अपन परंपरा के अनुसार जल भरे कलश के स्थापना करव अउ प्रकृति के प्रति आभार जतावव।
फेर का सिरिफ घर म दीया बारना काफी हे? नइ संगवारी हो! हमन अपन विचार म घलो दीया बारना हे। अज्ञान के बदला जागरूकता, स्वार्थ के बदला सेवा, भेदभाव के बदला सम्मान अउ निराशा के बदला सकारात्मकता के उजियारा फैलाना हे।
ए अवसर म अपन परिवार अउ आसपास के मनखे मन के संग मिलके अइसन काम करव, जेकर ले समाज ल असली फायदा होवय। कोनो पौधा लगावव, जल संरक्षण करव, जरूरतमंद ल पढ़ई म सहयोग देवव, बुजुर्ग मन के सहायता करव या अपन मोहल्ला ल साफ-सुथरा रखे के संकल्प लेवव।
काम छोटे होवय या बड़े, ओकर महत्व हमर भावना अउ लगातार प्रयास ले तय होथे। जब हमन अपन आसपास सकारात्मक बदलाव लाय के प्रयास करबो, त धीरे-धीरे ये एक बड़े सामाजिक आंदोलन के रूप ले सकथे।
प्रकृति के पूजा सिरिफ परंपरा निभाना नइ, बल्कि ओकर रक्षा करे के संकल्प घलो आय। दीया बारना सिरिफ शुभकामना नइ, बल्कि अपन भीतर जिम्मेदारी के उजियारा जगाना घलो आय।
अनेकता म एकता, यही भारत के पहचान
संगवारी हो, गांव हो या शहर, कस्बा हो या महानगर—हम सब एक समाज अउ राष्ट्र के हिस्सा अन। हमर बोली अलग हो सकथे, वेशभूषा अलग हो सकथे, मान्यता अउ परंपरा अलग हो सकथे, फेर हमर मानवीय संवेदना हमन ल एक सूत्र म बांधथे।
किसी जरूरतमंद के सहायता करे के पहिली हमन ओकर जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति काबर पूछन? मानवता के सेवा अइसन भावना आय, जे हर सीमा ले ऊपर उठके हमन ल एक-दूसर ले जोड़थे।
अपन कर्तव्य निभाना, दूसर के सम्मान करना अउ समाज के प्रति जिम्मेदारी पूरा करना ही हमर प्रमुख धरम होना चाही।
आवव, अइसन सामाजिक माहौल बनावन, जहां संवाद होवय, सहयोग होवय, आपसी विश्वास होवय अउ हर मनखे ल सम्मान के संग आगू बढ़े के अवसर मिलय।
हमन संग चलबो, संग बढ़बो अउ जरूरत पड़ही त एक-दूसर के आवाज घलो बनबो। यही संगवारी भावना आय, यही सामाजिक एकता के ताकत आय।
संकल्प ले सिद्धि के रद्दा म
आवव, एक बार फेर अपन आप ले सवाल करन—हमन आवइया पीढ़ी ल कइसन छत्तीसगढ़ सौंपना चाहथन?
अइसन छत्तीसगढ़, जहां विकास होवय, फेर प्रकृति के कीमत म नइ। आधुनिकता होवय, फेर संस्कृति ल भुलाके नइ। आर्थिक समृद्धि होवय, फेर मानवीय संवेदना ल गंवाके नइ।
अइसन छत्तीसगढ़, जहां युवा मन ल अवसर मिलय, किसान अउ मजदूर के मेहनत के सम्मान होवय, महिला मन के गरिमा अउ सुरक्षा सुनिश्चित होवय, कमजोर वर्ग के मनखे मन ल आगू बढ़े के सहारा मिलय अउ हर नागरिक प्रदेश के विकास म अपन भूमिका निभा सकय।
एखर बर सरकार, सामाजिक संस्था, शिक्षण संस्थान, उद्योग अउ हर नागरिक ल अपन-अपन जिम्मेदारी निभाय के जरूरत हे।
सिरिफ संकल्प लेय ले बदलाव नइ आवय। संकल्प ल काम म बदले ले बदलाव आथे।
आवव, छत्तीसगढ़ के 27वां राज्य स्थापना दिवस म हम सब मिलके ये वचन लेवन कि अपन चेतना, समय, मेहनत अउ प्रतिभा के उपयोग समाज अउ राष्ट्र के सेवा म घलो करबो। जल, जंगल, जमीन अउ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण करबो। सत्य, जागरूकता, सम्मान अउ मानवता के मूल्य ल आगू बढ़ाबो।
हमर लक्ष्य सिरिफ एक विकसित छत्तीसगढ़ नइ, बल्कि संवेदनशील, समरस, संस्कारित अउ प्रकृति के प्रति जिम्मेदार छत्तीसगढ़ होना चाही।
काबर कि छत्तीसगढ़ के भविष्य सिरिफ आज के उपलब्धि ले नइ, बल्कि आज लिए गए संकल्प अउ करे गए काम ले तय होही।
आवव, कुछ नवा करन, कुछ अलग करन अउ अइसन यादगार काम करन कि आवइया पीढ़ी कहय—हमर पुरखा मन हमन ल सिरिफ एक प्रदेश नइ, बल्कि एक बेहतर समाज अउ बेहतर भविष्य के धरोहर सौंपे रहिन।
इही भावना के संग छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के गाड़ा-गाड़ा बधाई अउ शुभकामना।
जोहार छत्तीसगढ़! जय भारत!
डॉ. उदयभान सिंह चौहान
भागीरथी छत्तीसगढ़ निर्माण



