खेमलाल साहू की टिप्पणी को समाज से जोड़ना पूरी तरह गलत — सामाजिक विवाद का रूप देना राजनीति से प्रेरित, पढ़िए पूरी खबर
पाटन,सेलूद/ सोशल मीडिया एवं कुछ समाचार माध्यमों से जानकारी प्राप्त हुई है कि सेलूद के पूर्व सरपंच खेमलाल साहू की सोशल मीडिया चैट में की गई टिप्पणी को लेकर जिस प्रकार से प्रस्तुत किया जा रहा है। यह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है।
खेमलाल साहू द्वारा उपयोग किया गया “अशुभहा” शब्द पद विशेष के संदर्भ में कहा गया शब्द था।न कि किसी समाज, जाति अथवा समुदाय के लिए। ऐसे में उक्त शब्द को किसी समाज विशेष से जोड़कर प्रस्तुत करना पूरी तरह भ्रामक है।
स्थानीय साहू समाज सेलूद के अध्यक्ष जयंत साहू ने इस बात पर असहमति जताते हुए कहा है कि किसी व्यक्ति विशेष से संबंधित टिप्पणी को पूरे समाज से जोड़ना उचित नहीं है। इससे समाज में अनावश्यक भ्रम एवं गलतफहमी पैदा होती है।
यह विषय मूल रूप से पूर्व सरपंच और वर्तमान सरपंच के बीच का स्थानीय एवं राजनीतिक मामला है। इसे सामाजिक विवाद के रूप में प्रचारित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
खेमलाल साहू केवल पूर्व सरपंच ही नहीं रहे हैं, बल्कि वे लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं तथा साहू समाज के विभिन्न सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रहे हैं। सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण वे इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि व्यक्तिगत व राजनीतिक टिप्पणी और किसी पूरे समाज के प्रति टिप्पणी में अंतर होता है। इसलिए इस टिप्पणी को किसी समाज विशेष की भावना से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
जिस प्रकार से सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में इस मामले को सामाजिक स्तर का विवाद बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। वह पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। यदि किसी टिप्पणी को लेकर विवाद है तो उसका वास्तविक संदर्भ, बातचीत और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने रखा जाना चाहिए।न कि उसे तोड़-मरोड़कर किसी पूरे समाज से जोड़ दिया जाए। किसी भी स्तर के पद प्रतिष्ठा में बैठने वाला व्यक्ति किसी न किसी समाज का होता ही है। जब आप जनता की सेवा के लिए बैठे है तो निश्चित रूप जनता जो है अपनी क्रिया प्रतिक्रिया व्यक्त करेगी ही l लेकिन हर क्रिया प्रतिक्रिया को सारे जनप्रतिनिधि समाज से जोड़कर देखने लगे तो फिर जनता अपनी प्रतिक्रिया दे ही नही सकती ?
समाज किसी व्यक्ति विशेष की टिप्पणी को पूरे समाज की भावना मानकर नहीं चलता। व्यक्तिगत मतभेद और राजनीतिक विवाद को सामाजिक विवाद का रूप देना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। किसी भी समाज को अनावश्यक रूप से विवाद में न घसीटा जाए परिक्षेत्रीय साहू समाज एवं स्थानीय साहू समाज इस बात पर असहमति प्रगट करती है। अगर उक्त चैटिंग को सामाजिक रंग दिया जाएगा तो निश्चित ही तेली समाज भी कमजोर समाज नही है। किसी के द्वारा सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन किया जाएगा तो मजबूरन हमे भी विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा।
राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं लेकिन सामाजिक भाईचारा और आपसी सद्भाव सबसे ऊपर है। राजनीति में लोग आएंगे जाएंगे किन्तु किसी भी व्यक्तिगत टिका टिप्पणी को सामाजिक रंग देना सर्वथा अनुचित है। गांव का सदभावना और भाईचारा सर्व समाज से संचालित होता है न कि राजनीति से। इसलिए सब मिलकर एकता और सुमति से जीवन यापन किया जाना ही उचित होगा l







