नौ महीना पहले प्रस्तावित शराब दुकान स्थगन के बाद फिर से हो रहा है शुरू ,नगर पालिका अध्यक्ष ने समय रहते क्यों नहीं लिया फैसला/ मोनू साहू
अमलेश्वर: दुर्ग जिला अंतर्गत नगर पालिका परिषद अमलेश्वर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 05 ग्राम खुड़मुड़ा में शराब दुकान खोलने की प्रक्रिया फिर से शुरू होने से ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में आक्रोश है। क्योंकि यह वार्ड परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के नाम से है जिसमें शराब तो क्या मांस मछली भी नहीं बिकना चाहिए।09 महीने पहले विरोध प्रदर्शन के बाद इस शराब दुकान को स्थगित किया गया था, लेकिन अब फिर से इसे खोलने की कोशिश की जा रही है।
पूर्व जिला पंचायत सभापति एवं छाया नगर पालिका अध्यक्ष मोनू साहू ने मीडिया को जानकारी शेयर करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों ने दो बार पी आई सी बैठक और सामान्य सभा बैठक की, लेकिन शराब भट्टी खोलने के विरोध में प्रस्ताव पारित नहीं कर पाए। इससे नगरवासियों में आक्रोश बढ़ रहा है।



नगर में भाजपा की सरकार है ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बाद भी नगर में कोई विकास की बात अभी तक नहीं हो पाई है नगर पालिका गठित होने के पश्चात तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगामी 20 वर्ष के विकास को लेकर के आधारशिला रखी थी और करोड़ों रुपए की घोषणा की थी जो आज ठंडा बस्ते में है सत्ता पक्ष के स्थानीय जनप्रतिनिधि आज शराब भट्टी खुलवाने के लिए अनुमति प्रदान कर रहे हैं।
नगर के प्रथम नागरिक को इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही जा रही है जो बहुत ही अशोभनीय है। नगर पालिका के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी इस बात की जानकारी थी यदि जनप्रतिनिधि को मालूम नहीं है तो नगर पालिका के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ही नगर में शराब भट्टी खोले जाने की मंजूरी को गोपनी रखा। जिस पर सत्ता पक्ष के स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठता है। आखिर इनको इसकी बात की जानकारी क्यों नहीं या नहीं दी है। जब नौ महीना पहले शराब दुकान खुलने वाले थे तब विरोध के बाद और पालिका चुनाव को देखते हुए स्थगन आदेश मौखिक रूप से दिया गया था।जिसकी जानकारी सबको है फिर भी कान में घी डाल कर सोए थे। बैठक में नहीं खोलने का प्रस्ताव पास नहीं कर पाए।जब कि नगर के विकास में बिना कोई ना नुकुर के हर मुद्दे पर मुहर लग रही है।लेकिन शरब भट्टी खोलने की मुद्दे पर चुप्पी कार्य शैली पर सवाल खड़ा करता है आखिर प्रस्ताव क्यों नहीं ली गई पूर्व में। इसके लिए जिम्मेदार सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि है जो इस बात को अपने बड़े नेता और सरकार के सम्बंधित मंत्री और अधिकारियो के बिच रखने में असफल हुए।
मोनू साहू साहू ने आगे कहा कि ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का विरोध इस बात का प्रतीक है कि वे अपने क्षेत्र में शराब की दुकान नहीं चाहते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है। स्थानीय सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों का क्या भूमिका होती है।



