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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमराई, किसान बेहाल, सरकार नाकाम/मधुकांत साहू

पाटन : जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी जिला अध्यक्ष मधुकांत साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ के धान मंडी केंद्रों में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कार्यकर्ता एवं प्रतिनिधि लगातार दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ का किसान इस समय धान बेचने को लेकर बुरी तरह परेशान और ठगा हुआ महसूस कर रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों के साथ शुरू से ही दोहरी नीति अपनाती आ रही है।

हम निम्न बिंदुओं के माध्यम से सरकार की किसान विरोधी नीतियों को उजागर करते हैं—

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1. धान बिक्री को लेकर अफरा-तफरी की स्थिति:

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प्रदेश भर के धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था फैली हुई है। कहीं बारदाना नहीं मिल रहा, कहीं सड़े-गले और छेद भरे बारदाने थमाए जा रहे हैं, जिससे किसानों का धान खराब हो रहा है।

2. तौल में खुला धोखाधड़ी:

कई केंद्रों में निर्धारित माप से अधिक तौल कर किसानों के साथ सीधा-सीधा धोखा किया जा रहा है। किसान मजबूरी में चुप रहने को विवश हैं।

3. टोकन व्यवस्था ने किसानों की कमर तोड़ दी:

ऑनलाइन टोकन के झंझट के कारण किसान 20 से 25 दिन तक अपने घरों में धान रखे रहने को मजबूर हैं। हर किसान के पास स्मार्ट मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा नहीं है।

4. धान सूखने से किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान:

लंबे समय तक धान घर में पड़े रहने से धान सूख रहा है, जिससे प्रति क्विंटल 4 से 5 किलो तक वजन कम हो रहा है। यह किसानों का सीधा-सीधा नुकसान है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।

5. एक दिन में सिर्फ 888 क्विंटल खरीदी की सीमा:

एक खरीदी केंद्र में प्रतिदिन केवल 888 क्विंटल धान खरीदी का नियम किसानों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। इससे किसान कई-कई दिनों तक लाइन में लगने को मजबूर हैं।

6. बोनस, सिंचाई और समर्थन मूल्य सिर्फ चुनावी जुमला:

कभी बोनस, कभी सिंचाई पानी तो कभी समर्थन मूल्य के नाम पर किसानों को भ्रमित किया गया, लेकिन ज़मीनी स्तर पर किसानों को आज भी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।

7. खाद के दाम बढ़ाकर किसानों पर डबल मार:

एक तरफ समर्थन मूल्य बढ़ाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, दूसरी तरफ खाद का दाम भी उसी अनुपात में बढ़ाकर किसानों की कमर तोड़ी जा रही है।

8. सरकार उद्योगपतियों पर मेहरबान, किसान उपेक्षित:

मौजूदा सरकार का अधिक ध्यान उद्योगपतियों पर है, जबकि अन्नदाता किसान पूरी तरह उपेक्षित हो चुका है।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी की प्रमुख मांगें:

– टोकन व्यवस्था को तत्काल फ्री किया जाए।

– सभी किसानों से बिना बाधा के धान की खरीदी सुनिश्चित की जाए।

– बारदाने की गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था तत्काल की जाए।

– तौल में हो रही गड़बड़ियों पर सख्त कार्यवाही हो।

– प्रतिदिन खरीदी की सीमा को बढ़ाया जाए।

– धान सूखने से हुए नुकसान की भरपाई सरकार करे।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी स्पष्ट चेतावनी देती है कि यदि शीघ्र ही धान खरीदी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो प्रदेशभर में किसान आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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