अमलेश्वरकुम्हारीखेती किसानी के गोठचरौदाछत्तीसगढ़जामगांव आरदुर्ग भिलाईदेश दुनियाधमतरीपाटनबालोदबिलासपुरभिलाई 3राजनांदगांवरानीतराईरायपुरसेलूद

10 साल का आर्यन पढ़ाई छोड़ गाय चराने मजबूर शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में कुचला गया शिक्षा का अधिकार 

भूषण देशलहरे पाटन: दुर्ग जिले के पाटन से लगे ग्राम पंदर में शिक्षा व्यवस्था की एक हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां एक ओर प्रदेश शासन शिक्षा गुणवत्ता वर्ष मना रहा है, वहीं दूसरी ओर महज 10 साल का एक मासूम बच्चा पढ़ना-लिखना छोड़कर गाय चराने को मजबूर हो गया है। पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला अखरा के प्रधान पाठक संतोष कुमार वर्मा ने अर्धवार्षिक परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले बच्चे आर्यन का नाम स्कूल से काट दिया। इससे बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित हो गया और मजबूरन घर की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए पशु चराने निकल पड़ा। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह घटना शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के क्षेत्र में हुई है, जहां स्वयं मंत्री ने पिछली बैठकों में डीईओ-बीईओ को सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधारने के कड़े निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल उलट है प्रधान पाठक की हठधर्मिता और लापरवाही ने एक गरीब मजदूर परिवार के बेटे का भविष्य ही उजाड़ दिया।

आर्यन के पिता जो रोज़-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं ज़िले के कलेक्टर के पास न्याय की गुहार लेकर पहुंचे। आंसू भरी आंखों से उन्होंने सवाल किया साहब मैं अनपढ़ हूं क्या मेरा बेटा भी अनपढ़ ही रहेगा पढ़ाई से पहले ही नाम काट दिया गया अब वह घर में क्या करेगा ।

Advertisement
Advertisement 1 Advertisement 2 Advertisement 3 Advertisement 4 Advertisement 5 Advertisement 6 Advertisement 7

कक्षा पहली से आठवीं तक अर्धवार्षिक परीक्षा प्रारंभ होनी है। परीक्षा से बिल्कुल पहले बच्चे का नाम काटना न सिर्फ अमानवीय, बल्कि सरासर ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) का उल्लंघन है। 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा दिलाना सरकार, प्रशासन और स्कूल—तीनों की जिम्मेदारी है। लेकिन यहां प्रशासनिक जवाबदेही का पूरा ढांचा ही सवालों के घेरे में है।

Advertisement
Advertisement 1 Advertisement 2 Advertisement 2 Advertisement 3 Advertisement 4 Advertisement 5 Advertisement 6 Advertisement 7 Advertisement 8 Advertisement 9 Advertisement 10 Advertisement 11 Advertisement 12

इससे पहले भी स्कूल में ताला बंद होने और अव्यवस्था से संबंधित खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अधिकारी तब भी केवल आश्वासन देकर चुप बैठ गए थे। न कार्रवाई हुई, न सुधार। अब उसी ढिलाई ने एक मासूम को शिक्षा से वंचित कर दिया। गांव में इस घटना को लेकर आक्रोश फैल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है प्रधान पाठक अपनी मनमर्जी चला रहे हैं गरीब का बच्चा है इसलिए नाम काट दिया, बड़े लोगों के बच्चों के साथ ऐसा नहीं होता प्रश्न यह भी उठ रहा है कि जब पूरा प्रदेश शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की कवायद में जुटा है, तो मंत्री के अपने ही क्षेत्र में इस प्रकार की घटना कैसे हो गई क्या शासन प्रशासन अब भी आंखें मूंदकर बैठे रहेंगे या फिर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई कर शिक्षा के अधिकार को दोबारा सम्मान दिलाया जाएगा आर्यन जैसे बच्चों का भविष्य किसी फाइल के नोटिंग में नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता में बसता है। क्या यह संवेदनशीलता जागेगी गरीब पिता का सवाल आज पूरे सिस्टम के सामने खड़ा है क्या गरीब होना गुनाह है क्या मेरे बेटे को पढ़ाई का हक नहीं

वर्षण।।

अभी मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं हैं और मेरे पास कोई शिकयत भी नही आई है पाटन बी ई ओ से जानकारी लेता हु तभी कुछ बता पाऊंगा
अरविंद मिश्रा जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग

वर्षण ।।
मुझे टीसी देने की कोई सौंक नही है मैं भी चाहता हु मेरा स्कूल अच्छा रहे और मैं आनुषण में रहता हु । उस लड़का को मैं कई बार समझाया भी था और उसके माता पिता को बुलाकर बोला हु तुम्हारा लड़का स्कूल में हुरंदा करते है और अभी अखरा मैदान में भागवत हुई है उसमे सायकल चोरी किया था , स्कूल में बच्चो को मारते रहते है लड़कियों के साथ भी मार पीट जैसे हरकत करते है रहते है उससे स्कूल का माहौल खराब हो रहा था इसी लिए मैं टीसी दिया हु ।
संतोष कुमार वर्मा प्रधान पाठक अखरा स्कूल पाटन।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!