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अमलेश्वर नगर पालिका में विकास ठप, अव्यवस्थाओं से जूझ रहे जनप्रतिनिधि और नागरिक

अमलेश्वर। दुर्ग जिले अंतर्गत नगर पालिका परिषद अमलेश्वर इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। नगर में विकास कार्यों की कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। जनप्रतिनिधि लगातार विकास कार्यों की मांग उठा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्य नजर नहीं आ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद अमलेश्वर में प्रशासनिक समन्वय का अभाव बना हुआ है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और पार्षदों के बीच तालमेल की कमी को विकास कार्यों में बड़ी बाधा माना जा रहा है।भाजपा के ट्रिपल इंजन की सरकार में भी नगर उपेक्षित है। इस स्थिति को लेकर नगर के चौक-चौराहों पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि उन्हें आय-व्यय संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए भी आवेदन देना पड़ रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेताओं ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, नगर पालिका कार्यालय में पार्षदों एवं विपक्ष के नेताओं के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था तक नहीं हो पाई है, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।

नगर पालिका उपाध्यक्ष ओमप्रकाश साहू ने भी इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए स्थानांतरित अभियंता के अटैचमेंट पर सवाल उठाए हैं, जिसके कारण आवश्यक कक्ष उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा, नगर पालिका कार्यालय स्वयं एक छोटे से भवन में संचालित हो रहा है, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अमलेश्वर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए सर्वसुविधायुक्त नगर पालिका भवन की अत्यंत आवश्यकता है, लेकिन इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।

उल्लेखनीय है कि अमलेश्वर को 21 जनवरी 2022 को राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत नगर पालिका परिषद का दर्जा प्राप्त हुआ था। इसे ग्राम पंचायत से उन्नत कर 20 वर्षों के विकास प्लान के साथ एक प्रमुख नगरीय निकाय के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी। रायपुर से सटे इस क्षेत्र में 10 विभागों और 13 से अधिक प्रशासनिक सेटअप के माध्यम से विकास कार्यों को गति देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वर्तमान हालात उस योजना पर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं।

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