पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण को नुकसान: तालाब के पौधे नष्ट कर, मिट्टी की चोरी; प्रतिबंधित अर्जुन वृक्षों की कटाई पर विभाग मौन

पाटन/अम्लेश्वर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के संदेश दिए जा रहे हैं, वहीं जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत कोपेडीह-कापसी एवं पाहंदा में पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले मामले सामने आए हैं। आरोप है कि मुरुम और मिट्टी परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्टरों ने मनरेगा से गहरीकरण किए गए तालाब के तटबंध को नुकसान पहुंचाते हुए ट्री गार्ड उखाड़ दिए, जिससे सैकड़ों पौधे नष्ट हो गए। वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधित अर्जुन वृक्षों की कटाई के बावजूद वन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कोपेडीह-कापसी के मारेगा (मनरेगा) अंतर्गत लाखों रुपये की लागत से तालाब का गहरीकरण कराया गया था, ताकि जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। लेकिन आरोप है कि रोड निर्माण और परिवहन कार्य के नाम पर ट्रांसपोर्टरों ने तालाब के तटबंध की मिट्टी ही निकालकर अन्यत्र ले गए। इस दौरान जेसीबी मशीन से तालाब किनारे लगाए गए ट्री गार्ड भी उखाड़ दिए गए, जिससे वहां लगाए गए सैकड़ों पौधे नष्ट हो गए।


ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के तटबंध को क्षति पहुंचने से जल संरक्षण की पूरी योजना प्रभावित हो गई है और सरकारी राशि से किए गए कार्यों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत पाहंदा में आम बगीचे के पास स्थित प्रतिबंधित अर्जुन वृक्षों की कटाई का मामला भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों के अनुसार लकड़ी ठेकेदारों द्वारा अर्जुन के पेड़ों को काटकर ट्रैक्टर में भरकर ले जाया गया। मामले की जानकारी वन विभाग को होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावे खोखले साबित होंगे। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा तालाब एवं वृक्षारोपण स्थल को हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।






