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बारिश के साथ दिखने लगा मोर गांव-मोर पानी’ अभियान का असर – गांव-गांव में लबालब भरी हैं आजीविका डबरियां, जल संरक्षण को मिलेगा विस्तार

दुर्ग, 06 जुलाई 2026/ मानसून की सक्रियता के साथ ही जिले में संचालित मोर गांव मोर पानी महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी हैं। पिछले कुछ दिनों से हुई अच्छी वर्षा के कारण अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से भर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ कृषि, सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को नई मजबूती मिल रही है। सीईओ जिला पंचायत श्री बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में एक ही वित्तीय वर्ष में 55,965 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 15 परकोलेशन पॉण्ड, 834 रिचार्ज पिट, 1324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 9663 सोख्ता गड्ढे, 123 ग्राम तालाब, 20518 कंटूर ट्रेंच, 26 चेक डैम तथा 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया।

भू-जल स्तर बढ़ाने तथा वर्षा जल के अधिकतम संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0 एवं मनरेगा के प्रभावी समन्वय से व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किए गए हैं। इन कार्यों से वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जिले की 300 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई। मानसून की वर्षा के साथ इन संरचनाओं के भरने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी परिणाम दे रहा है। जिले में निर्मित 30 आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं ’नवा तरिया आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत निर्मित 112 डबरी एवं तालाब भी वर्षा जल से लबालब भरने लगे हैं। इन जल संरचनाओं से मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए वर्षभर स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।

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