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नालियों में प्लास्टिक व डिस्पोजल फेंकने से बढ़ रही जाम की समस्या, स्वच्छता केवल स्थानीय प्रशासन की नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी

अम्लेश्वर/पाटन। स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण करना है, लेकिन जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत ग्राम पंचायत पाहंदा (अ) में लोगों में जागरूकता नही होने के कारण यह उद्देश्य प्रभावित होता दिखाई दे रहा है। गांव में कई स्थानों पर लोग घरों से निकलने वाला कचरा, सिंगल यूज प्लास्टिक, दोना-पत्तल, डिस्पोजल गिलास, पानी के पाउच एवं प्लास्टिक की बोतलें सीधे नालियों में फेंक रहे हैं, जिससे नालियां लगातार जाम हो रही हैं।

उल्लेखनीय है कि इस समस्या को पहले भी cgkegoth.com द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। पहली बारिश के दौरान नालियां जाम होने से बारिश का पानी सड़कों पर भर गया था। उस समय भी नालियों से बड़ी मात्रा में सिंगल यूज प्लास्टिक, दोना-पत्तल और अन्य कचरा निकला था। हालांकि पंचायत स्तर पर व्यापक सफाई नहीं हो सकी, लेकिन कुछ जागरूक ग्रामीणों ने अपने घरों के आसपास की नालियों की स्वयं सफाई की।

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वास्तविकता यह है कि नालियों में जमा होने वाला अधिकांश कचरा लोगों द्वारा ही फेंका जाता है। यदि हम स्वयं प्लास्टिक, पानी के पाउच, बोतलें और अन्य अपशिष्ट नालियों में डालेंगे तो नालियों का जाम होना स्वाभाविक है। इसका परिणाम वर्षा ऋतु में जलभराव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों के रूप में सामने आता है।

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यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े शहरों और छोटे कस्बों में भी देखने को मिलती है। नियमित सफाई के बावजूद नालियों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और डिस्पोजल सामग्री निकलती है, जिससे पानी की निकासी बाधित होती है।

स्वच्छता केवल स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी समान दायित्व है। यदि सभी लोग कचरे को नालियों में फेंकने के बजाय निर्धारित डस्टबिन या कचरा संग्रहण स्थल पर डालें, तो नालियां साफ रहेंगी, वर्षा जल की निकासी सुचारु होगी और स्वच्छ भारत मिशन को भी मजबूती मिलेगी। स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण के लिए जनभागीदारी ही सबसे प्रभावी उपाय है।

पत्रकार करन साहू की

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