“ग्रामीण भारत की सच्ची तस्वीर के शिल्पी — युग सृष्टा मुंशी प्रेमचंद”

अमलेश्वर। “विवेकानंद विचार मंच ने मनाई मुंशी प्रेमचंद की जयंती” स्वामी विवेकानंद विचार मंच के तत्वाधान में महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए किरणबाला वर्मा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे कहानीकार थे जिनकी कहानियां वास्तविक समस्याओं पर आधारित होती थी, गरीबी, जाति प्रथा ,छुआछूत, नशे का दुष्परिणाम यह सब आपकी कहानियों के विषय हैं। बचपन में ही माता-पिता को को देने और आर्थिक अभाव में जीने के बावजूद मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन में नकारात्मकता को हावी नहीं होने दिया और एक सकारात्मक सोच के साथ आपने जीवन जिया।
कृष्ण कुमार धुरंधर ने कहा की मुंशी प्रेमचंद का गोदान सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर चोट है जिसमें गरीब और गरीब होते जा रहे हैं l



देवेंद्र कुमार बंछोर ने नमक का दरोगा का जिक्र करते हुए कहा की ईमानदार व्यक्ति परेशान जरूर हो सकता है पर अंतत वह अपनी श्रेष्ठता जरूर साबित करता है और लोगों का सम्मान प्राप्त करता है l
विवेकानंद विचार मंच के प्रांतीय संयोजक ललित कुमार बिजौरा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद एक कथाकार, महान उपन्यास सम्राट के रूप में स्मरण किए जाते हैं जिनका जीवन और साहित्य गरीब, किसानों, शोषितों और आम आदमी की पीड़ा का चित्रण है l
बालमुकुंद मढरिया ने कहा कि प्रेमचंद आज के समाज में आदर्श साहित्यकार हैंl समारोह का संचालन और संयोजन करते हुए हेमंत मढरिया ने मुंशी प्रेमचंद को अमर साहित्यकार और उनकी रचनाओं को कालजई रचनाएं बताया



