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कमरछठ पर गूंजा आस्था का स्वर, संतान की सुख-समृद्धि के लिए माताओं ने रखा निर्जला व्रत

पाटन -संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर मंगलवार को गांव में कमरछठ (हलषष्ठी) पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांव की महिलाएं पूजा की तैयारियों में जुटी रहीं। पूजा स्थल पर महिलाओं की भीड़ लगी रही और पूरे वातावरण में भक्ति एवं आस्था का माहौल देखने को मिला।

महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हलषष्ठी माता की पूजा की और संतान की दीर्घायु एवं परिवार की खुशहाली की कामना की। पूजा के दौरान पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली पूजा सामग्री, पसहर चावल सहित विभिन्न सामग्रियां रखी गईं। महिलाओं ने सामूहिक रूप से कमरछठ की कथा सुनी और पूजा के बाद एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं।

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पूजा स्थल पर दिखी महिलाओं की भीड़

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गांव के बस्ती पारा में सुबह से ही महिलाएं पहुंचने लगी थीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ पूजा में हिस्सा लिया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर पर्व की परंपरा को निभाया।

सरपंच चंद्रिका साहू ने बताया, “कमरछठ हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। हम अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से व्रत रखते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को हम पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं।”

वहीं संतोषी साहू ने कहा, “पर्व के दिन पूरा परिवार एक साथ रहता है। पूजा-पाठ और कथा सुनने से मन को शांति मिलती है। हमारी कोशिश रहती है कि आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा और संस्कृति से जुड़ी रहे।”

ग्रामीणों ने कहा—पर्व से जीवित रहती हैं हमारी परंपराएं

गांव के बुजुर्ग रूप राम साहू ने बताया कि “कमरछठ केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी ग्रामीण संस्कृति और परंपरा से जुड़ा त्योहार है। इस दिन गांव की महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं, जिससे आपसी भाईचारा भी मजबूत होता है।”

आधुनिक दौर में भी ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पर्वों को उत्साह के साथ मनाया जाना हमारी संस्कृति की मजबूती को दर्शाता है।

बच्चों में भी रहा उत्साह

कमरछठ को लेकर महिलाओं के साथ-साथ बच्चों में भी उत्साह देखने को मिला। पूजा स्थलों पर परिवार के सदस्यों की आवाजाही बनी रही। शाम तक गांव में पर्व को लेकर धार्मिक एवं उत्सवी माहौल बना रहा। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने निर्धारित परंपराओं के अनुसार व्रत का पारण किया।

कमरछठ पर्व ने एक बार फिर गांव में आस्था, परंपरा और पारिवारिक एकजुटता की तस्वीर पेश की।

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