मॉडल ग्राम बनाने वाले सचिव महेंद्र साहू के लगातार ट्रांसफर पर उठे सवाल, आखिर विरोध की वजह क्या?
पाटन।जनपद पंचायत पाटन अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पतोरा को मॉडल ग्राम के रूप में पहचान दिलाने वाले पंचायत सचिव महेंद्र साहू के लगातार हो रहे विरोध और ट्रांसफर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और आम नागरिकों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि मॉडल ग्राम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सचिव को बार-बार विरोध और स्थानांतरण का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि ग्राम पंचायत पतोरा को मॉडल गांव के रूप में स्थापित करने में सचिव महेंद्र साहू की अहम भूमिका रही है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वे बिना प्रशासन की अनुमति और सहयोग के कार्य कर रहे थे, या फिर प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विकास कार्यों को आगे बढ़ा रहे थे।
यदि उनकी कार्यशैली में पहले से कोई त्रुटि थी, तो जनपद सीईओ और जिला पंचायत सीईओ द्वारा पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वहीं दूसरी ओर, हाल ही में सामने आए घटनाक्रम में सरपंच द्वारा पंचायत में तालाबंदी किए जाने और प्रशासन पर ट्रांसफर के लिए दबाव बनाए जाने की बात भी सामने आई है, जिसके चलते सचिव महेंद्र साहू का स्थानांतरण किया गया।
सूत्रों के अनुसार महेंद्र साहू ने स्वयं भी जिला पंचायत सीईओ को आवेदन देकर स्थानांतरण की मांग की थी। इसके बाद उनका ट्रांसफर ग्राम पंचायत पंहडोर किया गया, लेकिन वहां की सरपंच द्वारा भी इसका विरोध किया गया और प्रशासन को तालाबंदी की चेतावनी तक दी गई।
अब जानकारी सामने आ रही है कि महेंद्र साहू का स्थानांतरण ग्राम पंचायत भरर में किया गया है। ऐसे में यह सवाल और भी गहरा हो जाता है कि आखिर इसके पीछे किसका दबाव काम कर रहा है, जिसके चलते प्रशासन को बार-बार सचिव का ट्रांसफर करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत पतोरा को राष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिलाने में योगदान देने वाले सचिव महेंद्र साहू को लगातार विरोध और स्थानांतरण का सामना क्यों करना पड़ रहा है? क्या वास्तव में उनसे कोई गलती हुई है या फिर वे अनावश्यक दबाव का सामना कर रहे हैं? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग अब आम लोगों द्वारा की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर बार-बार ट्रांसफर की वजह क्या है। केवल जनप्रतिनिधियों के दबाव में किसी कर्मचारी को प्रताड़ित करना उचित नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब आम आदमी प्रशासन से जवाब मांग रहा है।



