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आखिर बिना किताब के इतने दिन तक कैसे संचालित- जिला प्रशासन की स्कूल

राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शाला प्रवेश उत्सव 2025-26 का आयोजन किया गया, लेकिन ग्राम रिसामा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में शाला प्रवेश के बावजूद बच्चों को आज तक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। यह गंभीर लापरवाही अब पालकों और जनप्रतिनिधियों के आक्रोश का कारण बन चुकी है।

पालक संघ बैठक व शाला प्रवेश उत्सव में उजागर हुई हकीकत शाला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव के साथ-साथ आयोजित पालक संघ की बैठक में यह बात सामने आई कि छात्र-छात्राएं अब तक किताबों के अभाव में पढ़ाई कर रहे हैं। बैठक में उपसरपंच मन्नूलाल साहू, पंच गितेश्वर साहू, माधुरी साहू, सोनी बाई, खिलेश्वरी यादव, सरस्वती साहू, कमल साहू, प्रिया गुप्ता सहित शाला के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में पालकगण उपस्थित थे।

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मई महीने में हर वर्ष स्कूलों को किताबें उपलब्ध करा दी जाती थीं, लेकिन इस वर्ष शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते अब तक छात्र-छात्राएं किताबों से वंचित हैं। मजबूरीवश उन्हें पुरानी, जर्जर और अधूरी किताबों से पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनका शैक्षणिक विकास बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

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जनपद सदस्य ढालेश साहू ने उठाए गंभीर प्रश्न
इस अवसर पर उपस्थित जनपद सदस्य व किसान नेता ढालेश साहू ने सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा:

“शाला प्रवेश उत्सव का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करना होता है, लेकिन जब किताबें ही नहीं दी गईं तो यह उत्सव केवल एक दिखावा बन कर रह गया है। आखिर बिना किताब के स्कूल इतने दिन तक कैसे संचालित हो रहे हैं?”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह स्थिति केवल ग्राम रिसामा की नहीं है, बल्कि दुर्ग जिले के कई स्कूलों में यही हालात हैं, जिससे शिक्षा विभाग की निष्क्रियता उजागर होती है।

शिक्षा विभाग से त्वरित कार्यवाही की मांग
पालकों एवं जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि शीघ्र किताबों की आपूर्ति की जाए, जिससे बच्चों की पढ़ाई बिना और विलंब के जारी रह सके। अभिभावकों का कहना है कि यदि सत्र की शुरुआत में ही किताबें नहीं मिलतीं, तो पूरे वर्ष की पढ़ाई बाधित हो सकती है।

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